
जयपुर। जय राधे जय राधे जय श्री कृष्ण बोलो जय राधे…, बरसाना में राधे राधे… वृंदावन में राधे राधे… जैसे जयकारे वृंदावन के साथ छोटी काशी जयपुर में भी गूंजते हैं। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी पर शनिवार को राधा अष्टमी महोत्सव पर राधे रानी का गुनगान होगा। इस दिन सौभाग्य योग के साथ रवि योग का संयोग रहेगा। वहीं शनि का अपनी स्वराशि कुंभ में रहना और बृहस्पति का मित्र राशि मेष में रहना श्रेष्ठ फलदायक होगा।
ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि राधा अष्टमी पर सौभाग्य योग और रवि योग का संयोग बन रहा है। सौभाग्य योग शुक्रवार रात 11.52 बजे से शुरू होगा, जो शनिवार को रात 9.30 बजे तक रहेगा। वहीं रवि योग भी शनिवार दोपहर 2.56 बजे शुरू होगा, जो पूरे दिन—रात रहेगा। इस दिन धनु का चन्द्रमा होने से श्रेष्ठता प्रदान करेगा। इसके साथ ही शनि देव अपनी स्वराशि कुंभ में रहेंगे और देवगुरु बृहस्पति अपनी मित्र राशि मेष में रहने से श्रेष्ठ फलदायक होगा।
जगतपुरा के श्रीकृष्ण बलराम मंदिर में आयोजन
जगतपुरा के हरे कृष्ण मार्ग स्थित श्रीकृष्ण बलराम मंदिर में शनिवार को राधारानी का प्राकट्य उत्सव मनाया जाएगा। दक्षिण भारत के मशहूर कांचीपुरम से मंगाई विशेष सिल्क व वृंदावनधाम से आने वाली रंग बिरंगी पोशाकों से राधा रानी का श्रृंगार होगा। शाम को 108 कलशों से अभिषेक का खास आकर्षण रहेगा और महाआरती होगी। रात को मुख्य मंदिर परिसर में पालकी में भगवान के दिव्य दर्शन होंगे।
108 कलशों से होगा राधे रानी का अभिषेक
मंदिर के अध्यक्ष अमितासन दास ने बताया कि मंदिर परिसर के गर्भ ग्रह को और नए भवन के अभिषेक स्थल सुधर्मा हाल को बेंगलुरु और दिल्ली से मंगाए गए विशेष फूलों से सजाया जाएगा। महोत्सव की शुरुआत सुबह मंगला आरती के दर्शनों से होगी। राधारमण जी को नए भवन के सुधर्मा हाल में स्थित मंच पर ले जाया जाएगा। महाअभिषेक में भगवान कृष्ण एवं राधाजी का विशेष 108 कलशों से नारियल पानी, पंचामृत, पंचगव्य, फलों के रस से अभिषेक होगा। अभिषेक के अवसर पर कृष्ण संकीर्तन एवं हरे कृष्ण महामंत्र पर मृदंग करताल बांसुरी जैसे यंत्रों की मधुर स्वर लहरियों पर भक्त नाचते गाते नजर आएंगे। भगवान को दिव्य व विशिष्ट भोग अर्पित किए जाएंगे।
यह है राधाष्टमी का महात्म्य
श्रीकृष्ण बलराम मंदिर अध्यक्ष अमितासन दास ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव के ठीक 15 दिन बाद उनकी आदि शक्ति राधारानी भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की पावन अष्टमी को प्रकट हुई थी। इस अवसर पर उनके पिता वृषभानु महाराज के भव्य उत्सव का आयोजन किया गया था। उसी समय से राधाष्टमी ब्रज अंचल सहित पूरे भारत में मनाने की परंपरा रही है।वृंदावन में सबसे भव्य राधाष्टमी उत्सव मनाया जाता है। इसी प्रकार जयपुर के राधाष्टमी का विशेष महत्व है, क्योंकि राधा रानी संपूर्ण ब्रह्मांड की आदिशक्ति है। वह करुणा की सागर है। राधा रानी के बिना कृष्ण भक्ति को नहीं पाया जा सकता।
गोद में लेकर गोकुल आए
श्रीकृष्ण बलराम मंदिर अध्यक्ष अमितासन दास ने बताया कि राधाष्टमी की महिमा धार्मिक ग्रंथो में इस प्रकार बताई गई है.. 'अष्टमयाम भद्रे शुक्लस्य साझा ता रविवासरे रात्रि परांंगण समये...' कृष्ण के दर्शन कर राधारानी ने नेत्र खोले थे, क्योंकि राधा रानी का प्राकट्य उत्सव विलक्षण घटना थी। वृषभानु महाराज स्वयं राधा रानी को गोद में लेकर गोकुल आए थे। उस समय तक राधा रानी के नेत्र बंद थे बाद में बालकृष्ण के स्पर्श से श्री राधे रानी की आंखें खुल गई। राधाष्टमी के दिन मंदिर में और घरों में भक्त उपवास रखेगे।
Updated on:
22 Sept 2023 12:00 pm
Published on:
22 Sept 2023 11:58 am
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