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World Radio Day : बॉलीवुड से ‘मैच’ करती रेडियो की ‘Frequency’

'तुम्हारी सुलु' या 'लगे रहो मुन्ना भाई' जैसी कुछ समकालीन फिल्मों को याद करना स्वाभाविक है, जहां मुख्य पात्रों में से एक रेडियो जॉकी है। 'टाइगर जिंदा है' का सबसे फेमस सॉन्ग 'दिल दिया गल्लां' भी याद आता है, जो शुरुआत में एक रेडियो गीत के रूप में दिखाया जाता है।

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जयपुर

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Aryan Sharma

Feb 13, 2023

World Radio Day : बॉलीवुड से मैच करती रेडियो की 'Frequency'

आर्यन शर्मा @ जयपुर. मन का रेडियो बजने दो जरा, गम को भूल कर जी ले तू जरा, स्टेशन कोई नया ट्यून कर ले जरा, फुल टू एटीट्यूड दे दे जरा...। हिमेश रेशमिया का यह गाना उनके द्वारा अभिनीत फिल्म का है, जिसका टाइटल है 'रेडियो : लव ऑन एयर' (2009)। यह गाना काफी हद तक इस वर्ष विश्व रेडियो दिवस की थीम 'रेडियो एंड पीस' का परिचायक है। बहरहाल, बॉलीवुड से रेडियो की 'फ्रीक्वेंसी' काफी मैच करती है। यानी बॉलीवुड फिल्मों और रेडियो का काफी पुराना रिश्ता है। न सिर्फ 'रेडियो' टाइटल से मूवी बन चुकी है बल्कि 'मन का रेडियो', 'सजन रेडियो.. ओओ.. बजइयो बजइयो बजइयो जरा...' (ट्यूबलाइट- 2017) सरीखे गाने भी हिंदी फिल्मों में आ चुके हैं, जिनके बोल में 'रेडियो' शब्द का इस्तेमाल हुआ है।
इतना ही नहीं, कई बॉलीवुड फिल्मों में नायक या नायिका रेडियो जॉकी, रेडियो अनाउंसर या रेडियो स्टेशन से जुड़े अन्य प्रोफेशनल के किरदार में नजर आ चुके हैं। फिल्म 'लगे रहो मुन्ना भाई' (2006) में नायिका विद्या बालन रेडियो जॉकी की भूमिका में थीं। फिल्म में उनका 'गुड मॉर्निंग मुंबई...' बोलने का अंदाज सबको लुभाता है। इस फिल्म के अलावा विद्या 'तुम्हारी सुलु' (2017) में भी आरजे का रोल अदा कर चुकी हैं, जिसमें वह लिस्नर्स के साथ प्यारी-प्यारी बातें करती हैं। फिल्म 'तड़का' (2022) में श्रिया सरन आरजे के किरदार से मधुरता फैलाती नजर आईं। वहीं, फिल्म 'दिल से..' (1998) में शाहरुख खान ऑल इंडिया रेडियो में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के रोल में दिखाई दिए थे।
खास बात यह है कि बॉलीवुड फिल्मों के कई कलाकारों ने एक्टिंग डेब्यू से पहले रेडियो अनाउंसर या रेडियो जॉकी के रूप में काम किया है। इनमें प्रमुख नाम है सुनील दत्त। इनके अलावा सईद जाफरी, आयुष्मान खुराना, मनीष पॉल, मंत्रा, अपारशक्ति खुराना, मलिष्का मेंडोंसा जैसे कई नाम हैं, जिन्होंने रेडियो के रास्ते एक्टिंग में एंट्री ली। खैर, एक दौर तो ऐसा था जब रेडियो पर बजने वाले गीतों से गीत-संगीत की पॉपुलैरिटी तय होती थी। रेडियो सीलोन और फिर विविध भारती पर प्रसारित 'बिनाका गीतमाला' की 40 बरस से भी ज्यादा तक धूम रही। यह हिंदी सिनेमा के टॉप फिल्मी गीतों का काउंटडाउन शो था। ऑन स्क्रीन और ऑफ स्क्रीन भी रेडियो हिंदी सिनेमा का अभिन्न अंग था! बीती सदी में कुछ दशकों तक, हिंदी फिल्मों के गाने सुनने के लिहाज से रेडियो घर का एक अनिवार्य हिस्सा था। रेडियो पर कई ऐसे प्रोग्राम प्रसारित होते थे, जिनमें लोगों के फरमाइशी गीत सुनाए जाते थे। लोग अपनी फरमाइश चिट्ठी लिख कर बताते थे। रेडियो का पुरानी हिंदी फिल्मों में एक सपोर्टिंग और कभी-कभी मेजर रोल भी रहा है, यदि प्रमुख पात्रों में से एक गायक है। ऐसी फिल्मों में हमेशा रेडियो रिकॉर्डिंग स्टूडियो में कम से कम एक गाना फिल्माया जाता था और रेडियो पर लाइव प्रसारित किया जाता था। तब रेडियो ही गीतों के प्रसारण का एकमात्र सुगम साधन था, इसलिए ऐसे गीतों की संख्या अधिक थी।


आइए, आपको कुछ उन गानों का स्मरण कराते हैं, जिनमें काफी हद तक 'रेडियो' है।

जीवन बीन मधुर न बाजे...

मैंने देखी जग की रीत...

सांवरे सांवरे...

जिंदगी भर नहीं भूलेगी...

हमने तुझको प्यार किया है जितना...

वो हम न थे...

दिल का दर्द निराला...

हाय रे तेरे चंचल नैनवा...

प्यार की दास्तां तुम सुनो...

आज की रात बड़ी शोख बड़ी नटखट...

गम उठाने के लिए...

हमने देखी है उन आंखों की महकती खुशबू...

पिया बिना पिया बिना...

आते जाते खूबसूरत आवारा...