
शादाब अहमद/ नई दिल्ली।
राजस्थान में सियासी संग्राम के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के साथ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह निर्वाचन झालावाड़ जिले की झालरापाटन विधानसभा सीट से दस्तक देने वाले हैं। वहीं इसके आगे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का निर्वाचन क्षेत्र कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र है। यहां बिरला ने अपनी पकड़ को दिन-ब-दिन मजबूत किया है। ऐसे में कांग्रेस वसुंधरा और बिरला के गढ़ में यात्रा के बहाने अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेगी।
राजनीतिक तौर पर झालावाड़-बारां और कोटा-बूंदी लोकसभा सीट खासा महत्व रखती है। इसके अलावा कांग्रेस के अंदरूनी खींचतान के लिहाज से भी यात्रा का मार्ग खासा अहम है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बहिष्कार के मामले में नोटिस झेल चुके वरिष्ठ नेता व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल का निर्वाचन क्षेत्र कोटा उत्तर भी यात्रा के मार्ग में आएगा।
कोटा में नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने खासा विकास कार्य करवाए हैं। यात्रा के बहाने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व मंत्री धारीवाल को राहुल व अन्य राष्ट्रीय नेताओं को कोटा के विकास कार्य दिखवाने का मौका भी होगा।
मां-बेटे लगातार यहां से विजयी
झालावाड़-बारां लोकसभा सीट पर 1984 के चुनाव में कांग्रेस को आखिरी बार जीत मिली थी। इसके बाद 1989 से लेकर 2019 तक हुए 9 चुनावों में राजे व उनके पुत्र दुष्यंत सिंह ने इस सीट पर कब्जा जमा रखा है। इसके अलावा 2018 में कांग्रेस ने प्रदेशभर में जीत हासिल कर सरकार बनाई, लेकिन झालावाड़ जिले की चारों सीट पर हार का सामना करना पड़ा।
सबसे बड़ी बात यह है कि झालरापाटन व खानपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस 1998 के बाद आज तक जीत नहीं मिली है। जबकि मनोहरथाना व डग सीट पर भी लगातार दो चुनावों में हार मिल चुकी है। हालांकि झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र में आने वाले बारां जिले में खान मंत्री प्रमोद जैन भाया की पकड़ जरूर है। यही वजह है कि बारां की 4 में से 3 सीट कांग्रेस की झोली में है।
बिरला की लगातार हो रही जीत
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 2003 में पहली बार विधानसभा चुनाव कोटा से लड़ा और जीते। इसके बाद 2008 व 2013 में कोटा दक्षिण से विधायक निर्वाचित हुए। वहीं 2014 व 2019 में लोकसभा का लगातार चुनाव जीता। वहीं इस लोकसभा सीट की 8 में से 5 विधानसभा सीट भाजपा के कब्जे में हैं। उनकी पकड़ भी लगातार मजबूत होती जा रही है। इस कारण कोटा दक्षिण व बूंदी विस सीट से कांग्रेस को लगातार तीन बार हार मिली है। कोटा जिले की रामगंजमंडी व लाडपुरा सीट पर कांग्रेस 1998 के बाद नहीं जीती।
यात्रा झालावाड़ से ही क्यों?
यात्रा का प्रवेश राजस्थान में किसी और जगह से भी हो सकता था। कांग्रेस के एक वर्ग का कहना था कि यात्रा का प्रवेश कांग्रेस के मजबूत इलाके बांसवाड़ा से होना चाहिए। जहां आदिवासी बाहुल्य है। वहीं दूसरा वर्ग चाहता था कि भाजपा व जनता के बीच संदेश देने के लिए भाजपा के मजबूत क्षेत्रों से यात्रा निकालना जरूरी है। इससे यात्रा को झालावाड़ से प्रवेश कराया जा रहा है।
एकजुट करने के साथ भरेंगे जोश
यात्रा के बहाने कांग्रेस नेताओं की अंदरूनी कलह दूर कर एकजुट कर जोश भरने की कोशिश भी है। राहुल भाजपा पर तीेखा प्रहार कर रहे हैं, वहीं सभी नेताओं को एकसाथ लेकर चलने की कोशिश भी कर रहे हैं।
Published on:
02 Dec 2022 01:26 pm
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