प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्र के सहयोग से कुछ नए प्रोजेक्ट भी धरातल पर उतरेंगे। आदर्श नगर स्थित दशहरा मैदान में शुक्रवार को विकसित भारत संकल्प यात्रा की सभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जयपुर में रिंग रेलवे पर काम शुरू होगा। उन्होंने कहा कि राजधानी की आबादी 40 लाख के पार हो चुकी है। यहां विकास का नया कॉन्सेप्ट होना चाहिए। खासकर ट्रेन को आधार बनाते हुए सार्वजनिक परिवहन का विकास होना चाहिए। इसके लिए रिंग रेलवे बेहतर विकल्प है।उन्होंने कहा कि अभी इस कॉन्सेप्ट पर सोचना शुरू किया है। जल्द ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ बैठकर अगले चरण की चर्चा करेंगे। रेल मंत्री के बाद जब नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जयपुर के विकास के लिए रेल मंत्री ने जो प्लान बताया है, उसके लिए हमारा विभाग और सरकार साकार करेंगे।
दरअसल, रिंग रेलवे सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में नया कॉन्सेप्ट है। यह प्रोजेक्ट शहर के बाहरी इलाकों को जोड़ेगा। ताकि, लोगों की आवाजाही सुगम होग। एक्सपर्ट मानते हैं कि रिंग रोड की तर्ज पर इसे विकसित किया जाएगा।
प्रभु दर्शन के दौरान आया आइडिया
मंच से संबोधित करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि गोविंददेवजी मंदिर के दर्शन के लिए गया। जो जयपुर की आबादी को ध्यान में रखते हुए विकास के नए कॉन्सेप्ट पर विचार किया। होना क्या चाहिए, यह सोच हा था। दर्शन के दौरान रिंग रेलवे का खयाल आया। ये योजना चारो हिस्सों को जोड़ेगी। इससे आगामी 50 वर्ष का विकास हो सकता है। मैं मुख्यमंत्री और नगरीय विकास मंत्री से अनुरोध करूंगा कि इस कॉन्सेप्ट को बनाएं।
टॉपिक एक्सपर्ट
शहर के बाहरी हिस्सों और सैटेलाइट टाउन इस प्रोजेक्ट से जोड़े जा सकते हैं। लोग काम करके वापस आ और जा सकेंगे। इससे लोगों की राह सुगम होगी। हालांकि, द्वितीय और तृतीय चरण की कनेक्टिविटी को भी बेहतर करना होगा। यानी ट्रेन से उतरने के बाद मेट्रो और बसें यात्री को तुरंत मिले। विकसित देशों में सार्वजनिक परिवहन मल्टी मॉडल सिस्टम पर काम करता है। एक ही कार्ड से लोग रिंग रेलवे, मेट्रो से लेकर सिटी बस में सफर के दौरान किराया देते हैं।
-वीएस सुंडा, सेवानिवृत्त निदेशक, अभियांत्रिकी शाखा, जेडीए
राजधानी में सार्वजनिक परिवहन का बुरा हाल
-जयपुर में सार्वजनिक परिवहन का बुरा हाल है। जेसीटीएसएल सिर्फ 200 बसों का ही संचालन कर पा रहा है। जबकि, आबादी के हिसाब से 1500 बसों का संचालन होना चाहिए।
-मेट्रो फेज-2 का प्लान बने तो दस वर्ष से अधिक को चुका। लेकिन अम्बाबाड़ी से सीतापुरा तक के इस प्लान अब तक धरातल पर नहीं आया है।