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… और Cancer से जंग हारा राजस्थान ACB का इन्स्पेक्टर विक्रम सिंह, बड़े खुलासों के रहे ‘सूत्रधार’

1976 में सीकर जिले के खुडी-लक्षमनगढ में जन्में विक्रम सिंह ने करीब 10 साल तक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में सेवाएं दीं। इस दौरान कई मामलों के खुलासे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाई प्रोफ़ाइल मामलों के बड़े खुलासों में आईएएस और आईपीएस जैसे ओहदेदारों को घूसखोरी के चलते जेल जाना पड़ा। ये वो मामले रहे जिनके खुलासे में विक्रम सिंह सूत्रधार बने।

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जयपुर।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में इन्स्पेक्टर विक्रम सिंह शेखावत ( Rajasthan Anti Corruption Bureau Inspector Vikram Singh Shekhawat ) आखिरकार कैंसर ( Cancer ) से जंग लड़ते हुए ज़िन्दगी की जंग हार गए। वे पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। डॉक्टरों उन्हें वेंटिलेटर पर रखकर इलाज कर रहे थे। इस बीच न सिर्फ उनके परिवारजन बल्कि पुलिस महकमें के अधिकारियों से लेकर जवान तक उनकी सलामती की कामना कर रहे थे। इन्स्पेक्टर विक्रम सिंह ने अपनी काबलियत की वजह से एसीबी के 'हीरो' की पहचान बना ली थी। उनके निधन पर मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री ने भी शोक जताया है।


सीएम गहलोत ने अपने शोक सन्देश में कहा, 'राजस्थान के एक बहादुर और समर्पित अधिकारी, एसीबी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह शेखावत के निधन की खबर से गहरा दुख हुआ। उनका निधन एक बहुत बड़ी क्षति है... उनकी आत्मा को शांति मिले। उनके परिवार के सदस्यों के लिए मेरी हार्दिक संवेदना और प्रार्थना। ईश्वर उन्हें शक्ति दे।'


वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी ट्वीट कर अपने शोक सन्देश में लिखा, 'राजस्थान के समर्पित अधिकारी, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में कार्यरत इंस्पेक्टर विक्रम सिंह शेखावत के असामयिक निधन का समाचार सुन गहरा दुःख हुआ। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि वें दिवंगत की आत्मा को शांति तथा शोक-संतप्त परिजनों को संबल प्रदान करें।'


इधर, डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने भी शेखावत के निधन पर दुःख प्रकट किया है। पायलट ने शोक सन्देश में लिखा, 'ACB में कार्यरत पुलिस इंस्पेक्टर विक्रम सिंह शेखावत के निधन की खबर से मन व्यथित है। इस दुःखद घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारजनों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति एवं परिजनों को यह आघात सहन करने का संबल प्रदान करें।

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने सन्देश में लिखा, 'सीकर से इंस्पेक्टर विक्रम सिंह शेखावत, एक जुझारू ऑफिसर थे। कुछ समय से कैंसर के कारण हस्पताल में भर्ती थे। आज उनके अकस्मात निधन का समाचार सुन स्तब्ध हूं। युवा अवस्था में कैंसर जैसे रोगों का यू प्राण हर लेना मन को विचलित कर देता है। निशब्द श्रद्धांजलि। ॐ शांति।।'

इसलिए बनी काबिल इन्स्पेक्टर की पहचान

1976 में सीकर जिले के खुडी-लक्षमनगढ में जन्में विक्रम सिंह ने करीब 10 साल तक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में सेवाएं दीं। इस दौरान कई मामलों के खुलासे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाई प्रोफ़ाइल मामलों के बड़े खुलासों में आईएएस और आईपीएस जैसे ओहदेदारों को घूसखोरी के चलते जेल जाना पड़ा। ये वो मामले रहे जिनके खुलासे में विक्रम सिंह सूत्रधार बने।


विक्रम सिंह के सहयोगी बताते हैं कि डिपार्टमेंट में जब भी कोई बड़े मामले की तहकीकात करनी होती तब अफसर विक्रम सिंह को टीम में ज़रूर शामिल करते। एसीबी महकमे में विक्रम ने सबसे काबिल इंस्पेक्टरों की फहरिस्त में अपनी एक अलग ही पहचान बना ली थी।

कैंसर की शिकायत, गिरता रहा स्वास्थ्य

एसीबी के इन्स्पेक्टर विक्रम सिंह का स्वास्थ्य अचानक से गिरता चला गया। डॉक्टरी जांच में उन्हें कैंसर का पता चला। इसके बाद वे लगातार उपचार लेते रहे। जानकारी के अनुसार 6 जून की रात वे अचानक से अचेत हो गए। उन्हें बेहतर इलाज के लिए मुम्बई भी ले जाया गया। इसके बाद उन्हें जयपुर के नारायणा अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहां विक्रम को बचाने की डॉक्टरों ने भरसक कोशिश की, लेकिन इस जांबाज इन्स्पेक्टर को बचाना नहीं जा सका।


इन बड़े मामलों में रहे 'सूत्रधार'

- डिप्टी सेक्रेटरी गृह अनिल पालीवाल ट्रेप केस

- आईएनसी सलाहकार महेश शर्मा ट्रेप केस

- अजमेर एसपी राजेश मीणा ट्रेप केस

- जिला जज अजय शारदा मामला

- नकली घी रैकेट खुलासे के करीब 11 मामले

- एसपी कोटा सतवीर सिंह ट्रेप केस

- वरिष्ठ आईएएस अशोक सिंघवी खान महाघूसकांड मामला

- एनआरएचएम भ्रष्टाचार मामला

- PHED भ्रष्टाचार मामला


विक्रम सिंह के पारिवारिक सूत्रों की माने तो वे कोटा में अपने ही अफसरों की साजिश का शिकार हुए थे, जिसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर खेती करने का मन बना लिया था। लेकिन फिर ब्यूरो में ही तैनात कुछ अधिकारियों और साथी जवानों ने उनकी हौंसला अफ़ज़ाई की, जिसके बाद उन्होंने सेवाएं जारी रखीं।