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सिविल लाइंस ‘सत्ता’ के साथ, ‘राज’ बदलेगा या ‘रिवाज’

राजस्थान में हर पांच साल में सत्ता बदलने का रिवाज है।

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जयपुर

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Rahul Singh

Nov 11, 2023

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राजस्थान में हर पांच साल में सत्ता बदलने का रिवाज है। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सरकार के मंत्रियों समेत विपक्ष के नेता का आंगन (सरकारी निवास) बनी सिविल लाइंस सीट भी इसी रिवाज को निभा रही है। 2008 में परिसीमन के बाद बनी इस सीट पर दो बार कांग्रेस और एक बार भाजपा का राज आया। खास बात यह है कि सिविल लाइंस की जनता ने जिस पार्टी के उम्मीदवार को जिताया। प्रदेश में उसी पार्टी की सरकार बनी। तीन चुनाव के बाद इस बार इस सीट के लिए यह चौथा चुनाव है। ऐसे में सभी के मन में सवाल है कि 2023 के इस चुनाव में सिविल लाइंस का मतदाता राज बदलेगा या रिवाज।

सिविललाइंस सीट में इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा में ही सीधी टक्कर है और काेई तीसरा प्रत्याशी ऐसा नहीं है जो मुकाबले को त्रिकोणीय बना सके। कांग्रेस ने केबिनेट मंत्री और विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास को चाैथी बार विधानसभा का टिकट दिया है, वहीं भाजपा ने नए चेहरे गोपाल शर्मा पर दांव खेला है। पार्टी ने पूर्व विधायक और पिछले चुनाव के प्रत्याशी अरुण चतुर्वेदी का टिकट काट दिया है। भाजपा ने चार चुनाव में तीन प्रत्याशियों को मौका दिया है। पहले चुनाव में अशोक लाहोटी, दूसरे और तीसरे चुनाव में अरुण चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाया था। इस बार उनका टिकट कटने से उनके समर्थकों में नाराजगी है वहीं जयपुर हैरिटेज की मेयर रह चुकी मुनेश गुर्जर को हटाए जाने से उनके समर्थक खाचरियावास से नाराज चल रहे है। ऐसे में दोनों प्रत्याशी के सामने यह चुनौती बनी हुई है। वहीं भाजपा के बागी नेताओं के नामांकन वापस लेने से जरूर पार्टी को राहत मिली है। अबकी बार दोनों प्रत्याशियों के बीच रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा हालांकि दोनों ही अपनी जीत के दावे कर रहे है। सिविललाइंस इलाके में पूरा सिविललाइंस, बाइस गोदाम, सोडाला, हसनपुरा, न्यू सांगानेर रोड, श्याम नगर, हवा सडक, रामनगर, बनीपार्क और शास्त्रीनगर आदि प्रमुख रूप से आते है।


प्रत्याशियों के वादे
कांग्रेस
सिविललाइंस में सारी हाइटेंशन लाइन हटाएंगे
क्षेत्र के बाजारों में बची हुई कालोनियों में सीसीटीवी कैमरे लगवाएंगे
पूरे इलाके को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित करेंगे। नए पार्क का निर्माण
भाजपा
पूरे इलाके में विकास को नई गति
सिविललाइंस में सुरक्षा, शांति और सद्भभाव
महिला सुरक्षा पर फोकस

2018 चुनाव में मिले वोट
- 87937 कांग्रेस
69859 भाजपा

बडे मुद्दे
सिविललाइंस में पुलिया का निर्माण पूरा नहीं हुआ
यातायात के दबाव को दूर करने के लिए रेड लाइट फ्री सिग्नल जरूरी
कई कालोनियों में ड्रेनेज और सीवर लाइन की समस्या
गुर्जर की थड़ी और अन्य कई जगह कच्ची बस्तियां और कचरा डंपर यार्ड

2,45,434 लाख मतदाता इस सीट पर

4406 नए मतदाता जुडे़ हैं इस बार इस सीट पर

खास बातें
पिछली बार इस सीट पर 18 प्रत्याशी मैदान में थे। इस बार घटकर 10 ही रह गए। बसपा प्रत्याशी ने तो नाम ही वापस ले लिया। सामान्य और ओबीसी मतदाताओं की सर्वाधिक संख्या, दो बार कांग्रेस और एक बार भाजपा ने जीती सीट

मतदाता बोले
सिविललाइंस में पॉश कालोनियों में तो सफाई और अन्य समस्याओं का पूरा ध्यान रखा जाता है, बाकी जगहें समस्याओं से लोग परेशान है- लोकेश शर्मा, रामनगर

- शहर में अब ज्यादा यातायात का दबाव सोडाला, अजमेर रोड, न्यू सांगानेर रोड पर देखने काे मिलता है। हालांकि एलीवेटेड और नई पुलियां बनी है। लेकिन बाकी जगह भी इनका निर्माण करने की जरूरत है-
सपना जैन, शास्त्रीनगर