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कभी चुनावी सभाओं का हुआ करता था अलग अंदाज, तांगे पर माइक से देते थे सूचना

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जयपुर

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Dinesh Saini

Oct 15, 2018

Old Jaipur Election

- जितेन्द्र सिंह शेखावत
जयपुर। एक जमाने में चुनावों के दौरान पुराने विधानसभा भवन (हवामहल) के पास धाभाईजी की हवेली और माणक चौक की चौपड़ के अलावा गवर्नमेंट हॉस्टल राज्य की राजनीतिक सरगर्मियों का मुख्य केन्द्र बन जाते थे। 70 के दशक में कांग्रेस, जनसंघ व स्वतंत्र पार्टी के अलावा समाजवादी और वामपंथी दलों का दबदबा रहा। तब विधायक व सांसदों को विधायक निवास बने गवर्नमेंट हॉस्टल में ठहराया गया था। उस जमाने के नेता और कार्यकर्ता आज की तरह हाइटेक नहीं थे। जनसंघ के Bhairon Singh Shekhawat (पूर्व मुख्यमंत्री), सतीशचन्द्र अग्रवाल, समाजवादी नेता प्रो.केदार नाथ, कुम्भाराम, कामरेड रामानन्द अग्रवाल, कांग्रेस के राम किशोर व्यास, ज्वाला प्रसाद शर्मा, निरंजन नाथ आचार्य जैसे दिग्गज नेता आमजन से मेल-मुलाकात करते हुए तत्कालीन विधानसभा से पैदल ही या रिक्शा-तांगे से विधायक निवास पहुंचते थे और परिसर में कार्यकर्ताओं से मिलते थे।

- सत्तर के दशक में सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती भैरोंसिंह शेखावत (Bhairon Singh Shekhawat) की कुशल क्षेम पूछने गए मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा (Mohan Lal Sukhadia) और जनसंघ के नेता भानु कुमार शास्त्री। शेखावत दुर्घटना में घायल हो गए थे।

तांगे पर माइक से देते थे सूचना
तब टेलीफोन विधायक निवास में होने से विधायक-कार्यकर्ता कतार में लगे रहते थे। बड़ी चौपड़ यानी माणक चौक चौपड़ पर दिग्गज नेताओं की आमसभा हुआ करती थीं। वहीं चौपड़ के दूसरे भाग में तम्बू झंडे लगा धरना-प्रदर्शन होते, नेताओं की आमद-रफ्त बनी रहती थी। उस दौर में तांगा रिक्शा में बैठा कार्यकर्ता माइक से शहर भर में चौपड़ पर आमसभा होने की सूचना देता था। आपातकाल के पहले तक लोगों को राजनेताओं का भाषण सुनने का बेहद चाव था। तब सभा की समय सीमा नहीं होने से सभाएं देर रात तक चलती थीं। राजमहलों से निकली स्वतंत्र पार्टी की उम्मीदवार पूर्व राजमाता गायत्री देवी को सुनने का तो लोगों में मानों जुनून ही था। जनसंघ के भैरोंसिंह शेखावत, सतीशचन्द्र और कांग्रेस के राम किशोर व्यास, तकीउद्दीन अहमद, सरदार अजीत सिंह सागर की सभा में अच्छी भीड़ रहती थी। डॉ. यदुनाथ दशानन के मुताबिक खजानेवालों का रास्ता में घीसी लाल, चांदपोल में माधो पानवाला, बाबा हरिशचन्द्र मार्ग का चाय घाट और चौड़ा रास्ता का छप्परवाड़ चुनाव व राजनीति की चर्चा के ठिकाने हुआ करते थे।