
विधानसभा चुनाव में कैसा रहेगा चुनावी घोषणा पत्र... पढ़ भाजपा-कांग्रेस जिलाध्यक्ष का साक्षात्कार
मनीष शर्मा
जयपुर। कांग्रेस सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी रही है और राजस्थान में भी वह इसी कद के अनुरूप चुनाव लड़ती आई है। पिछले चार चुनाव से वह सभी 200 सीटों पर ताल ठोकती आ रही थी, लेकिन इस बार 195 सीटों पर ही प्रत्याशी उतारे। जाहिर है कोने-कोने में स्थापित रही पार्टी द्वारा पहले के मुकाबले कम सीटों पर चुनाव लडऩे से सवाल उठे कि क्या पार्टी की उपस्थिति सिमट रही है?
इसलिए हमने विश्लेषण किया कि आखिर कांग्रेस ने जब कम सीटों पर चुनाव लड़ा तो समस्त सीटों पर चुनाव लडऩे के मुकाबले उसकी क्या स्थिति रही? और जो तस्वीर उभरकर आई, वह इस सवाल के उलट है। आज तक समस्त सीटों पर चुनाव लडऩे पर कांग्रेस को सिर्फ एक बार ही स्पष्ट बहुमत मिला है जबकि 200 से कम सीटों पर ताल ठोकने पर दो बार वह स्पष्ट बहुमत तक पहुंची।
अभी तक सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत भी उसे 1985 में मिला था, जब वह 199 सीटों पर लड़ी थी। प्रदेश में वर्ष 1977 में विधानसभा की सीटें बढ़कर पहली बार 200 हुईं और कांग्रेस ने 186 प्रत्याशी उतारे थे, तब उसे हार का सामना करना पड़ा और उसके 36 साल बाद दूसरी बार 2018 में पार्टी ने तुलनात्मक रूप से कम 195 प्रत्याशी उतारे हैं।
36 साल, 10 चुनाव का हाल
पिछले 36 साल में 10 चुनाव हुए। कांग्रेस ने 5 बार सभी सीटों पर तो 5 बार (2018 समेत) 200 से कम प्रत्याशी उतारे हैं। 1990 में पहली बार 200 सीटों पर दावं खेला पर सीटें केवल 50 मिलीं। 1998 के चुनाव में 200 प्रत्याशियों में से रेकॉर्ड 153 जीते और 45 फीसदी वोट शेयर रहा। सबसे ज्यादा वोट शेयर 1985 में 47 फीसदी रहा, जब उसने 199 सीटों पर चुनाव लड़ा और 113 प्रत्याशी जीते थे।
Published on:
25 Nov 2018 10:48 am
