राजस्थान में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक दलों ने भी तैयारियां तेज कर दी है। जयपुर से दिल्ली तक मंथन का दौर चल रहा है। भाजपा कमजोर सीटों पर समय से पहले ही प्रत्याशी घोषित कर रही है। शुरुआत फिलहाल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से हो चुकी है।
प्रत्याशियों के चयन में जातीय, क्षेत्रीय, सामाजिक समीकरण के अलावा सोशल मीडिया पर सक्रियता से लेकर फॉलोवर्स की संख्या भी अहम भूमिका निभा रही है। विधानसभा या लोकसभा चुनाव में आवेदन करने वाले दावेदारों की मजबूती की पड़ताल के लिए पार्टी एजेंसियों का सहारा लेती है।
जिला इकाई उम्मीदवारों का पैनल प्रदेश इकाई को भेजती है, प्रदेश से सूची केंद्रीय चुनाव समिति को जाती है। पार्टी नेतृत्व स्वतंत्र एजेंसियों से दावेदारों की जिताऊ क्षमता, छवि, सक्रियता के बारे में पड़ताल करता है। एजेंसियों की सर्वे रिपोर्ट व पार्टी पदाधिकारियों की रिपोर्ट मैच होने पर मजबूत उम्मीदवार फाइनल हो जाता है। तीन दावेदारों की क्षमता बराबर ठहरती है तो उसमें कम उम्र को वरीयता दी जाती है।