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Rajasthan Election 2023: रिवर फ्रंट पर भाजपा और कांग्रेस… थर्ड फ्रंट को अब तक नो-एंट्री

Rajasthan Assembly Election 2023: हाड़ौती एक बार फिर राजनीतिक जोर आजमाइश के लिए तैयार हो रहा है। भाजपा जहां परिवर्तन यात्रा के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने के प्रयास में है।

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जयपुर

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Kirti Verma

Sep 08, 2023

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जयपुर. Rajasthan Assembly Election 2023: हाड़ौती एक बार फिर राजनीतिक जोर आजमाइश के लिए तैयार हो रहा है। भाजपा जहां परिवर्तन यात्रा के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने के प्रयास में है, वहीं कांग्रेस सरकारी योजनाओं का धुंआधार प्रचार कर सरकार रिपीट की तैयारी में जुटी है। यों तो हाड़ौती का मिजाज भाजपा को रास आता रहा है, लेकिन इस बार अंदरुनी गुटबाजी का शिकार भाजपा के लिए राह आसान नजर नहीं आ रही है। राज्य के दूसरे हिस्सों की तरह यहां तीसरे दल का वजूद कभी नहीं रहा और मुकाबला दो दलों के बीच ही सिमटता रहा है। दोनों दल फिलहाल टिकट बंटवारे की प्रक्रिया में उलझे हुए हैं।

दोनों तरफ टिकटों के लिए एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आ रही है। हाड़ौती के राजनीतिक इतिहास पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2003 से लेकर 2018 तक के चुनाव में भाजपा का दबदबा रहा है। चंबल और कालीसिंध नदी के इस इलाके में तीसरे दल को एंट्री नहीं मिल पाई है। भाजपा कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है। बेणेश्वर धाम से शुरू परिवर्तन यात्रा पूरी होने पर भाजपा यहां एक बड़ी सभा करने की तैयारी में है, तो कांग्रेस भी अगले सप्ताह एक बड़ी रैली करने जा रही है।

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जमीन बदलते रहे हैं यहां के नेता
वर्ष 2018 के चुनाव में भाजपा के मदन दिलावर ने अपनी परंपरागत बारां-अटरू सीट छोड़कर कोटा जिले की रामगंजमंडी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। वहीं रामगंजमंडी सीट से दो बार विधायक रहीं चंद्रकांता मेघवाल ने बूंदी जिले की केशवरायपाटन सीट से चुनाव लड़ा। केशवरायपाटन से चुनाव लड़ने वाले भाजपा के बाबूलाल नागर ने पिछला चुनाव बारां-अटरू से लड़ा। कांग्रेस के विधायक रामनारायण मीणा ने अपनी सीट बदलकर पिछला चुनाव पीपल्दा विधानसभा से लड़ा था। कोटा उत्तर के विधायक धारीवाल हिंडौली से भी चुनाव लड़ चुके हैं।

कांग्रेस-भाजपा के सामने बड़ी चुनौती
इस बार हाड़ौती में कांग्रेस-भाजपा दोनों के सामने बड़ी चुनौती है। झालावाड़ जिले की चारों सीटें भाजपा के पास हैं। इन्हें बचाए रखना भाजपा के लिए चुनौती है, वहीं इन सीटों पर काबिज होना कांग्रेस के लिए भी आसान नहीं है। बारां जिले की चार में से तीन सीटों पर कांग्रेस काबिज है, ऐसे में कांग्रेस के लिए इन्हें कायम रख पाना चुनौती है। कोटा जिले में 3-3 सीट दोनों के पास हैं। बूंदी में तीन में से दो सीट पर भाजपा काबिज है।

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2003 में दो सीटों पर निर्दलीय भी जीते
2008 में कोटा में कांग्रेस-भाजपा को 3-3 सीटें मिली। बूंदी में 3 में से 1 कांग्रेस और 2 भाजपा को, बारां में चारों सीटें कांग्रेस जीती। झालावाड़ में कांग्रेस-भाजपा 2-2 जीती। 2003 में कोटा की 5 में से 4 भाजपा, 1 कांग्रेस जीती। बारां में 2 भाजपा और 2 निर्दलीय जीते। झालावाड़ की सभी 5 पर भाजपा जीती। बूंदी में 3 कांग्रेस और 1 भाजपा को मिली।