
जयपुर/पत्रिका. Rajasthan Assembly Election 2023: राजनीतिक दल कार्यकर्ताओं की बैठकों और सभाओं में आम कार्यकर्ताओं को पार्टी की ताकत बताते हैं, लेकिन जब टिकट देने का समय आता है तो दौलतमंद दावेदारों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है।
प्रमुख राजनीतिक दल विचारधारा और सिद्धांतों को मानने वाले कार्यकर्ताओं को चुनने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के दफ्तरों में अनेक कार्यकर्ता दबी जुबान में यह कहते भी मिल जाते हैं कि टिकटों में चलती पैसे वालों की ही है। पिछले दो चुनावों का विश्लेषण करें तो कांग्रेस और भाजपा दोनों प्रमुख दलों ने अधिकतर करोड़पति दावेदारों को ही विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया। इसका स्पष्ट संकेत है कि चुनाव में बड़ा खर्चा होता है।
ऐसे में राजनीतिक दल भी ऐसे उम्मीदवारों की तलाश में रहते हैं, जो चुनाव का भारी भरकम खर्च खुद उठा सकें। इन दिनों टिकट के दावेदार शक्ति-प्रदर्शन के दौरान बडे़ स्तर पर धन खर्च कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि आचार संहिता से पहले ही चुनाव खर्च की सीमा को ये दावेदार लांघ रहे हैं। गाड़ियों के बड़े-बड़े काफिले, क्षेत्र में लगे होर्डिंग्स और कार्यकर्ताओं की दावतों पर होने वाला खर्च ये साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले चुनाव में भी बोलबाला धनबल का ही रहने वाला है।
Published on:
13 Sept 2023 10:32 am

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