
Rajasthan Assembly Election 2023: तीन प्रतिशत वोटों का स्विंग दिला रहा है सत्ता की चाबी
उमेश शर्मा।
प्रदेश के मतदाताओं का मूड हर पांच साल में बदलता नजर आ रहा है। पिछले 30 सालों के चुनाव नतीजों पर नजर डालें तो एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस की सरकार बनने का रिवाज चलता आ रहा है। इसमें वोट प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महज चार से पांच प्रतिशत वोट जिस पार्टी को ज्यादा मिले, उसकी सरकार बन गई।
यह बात अलग है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच जिस विधानसभा चुनाव में जीत—हार का वोट प्रतिशत ज्यादा रहा, उसें जीतने वाली पार्टी को बम्पर सीटें मिली। 1998 में जब कांग्रेस को 153 सीटों पर जीत मिली, तब उसे भाजपा के मुकाबले 11.72 फीसदी ज्यादा वोट मिले थे। यहीं नहीं 2013 में जब भाजपा को 163 सीटों पर जीत मिली, तब उसे कांग्रेस के मुकाबले 12.34 फीसदी मत ज्यादा मिले थे
1.89 लाख ज्यादा मिले और बन गई कांग्रेस की सरकार
वर्ष 2018 के चुनाव की बात की जाए तो कांग्रेस को भाजपा के मुकाबले 1 लाख 89 हजार 899 मत ज्यादा मिले थे और इन मतों के सहारे कांग्रेस अपनी सरकार बनाने में सफल रही। दोनों पार्टियों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर महज 0.54 फीसदी था। कांग्रेस को कुल 1 करोड़ 40 लाख 18 हजार 945 मत मिले थे, जबकि भाजपा को 1 करोड़ 38 लाख 29 हजार 046 मत मिले थे।
तीन फीसदी से कम वोटों के अंतर से बन रही सरकार
2003 के चुनाव पर नजर डालें तो भाजपा ने कांग्रेस से 2.38 फीसदी ज्यादा मत पाकर सरकार बना ली। इसी तरह 2008 में कांग्रेस ने भाजपा से 2.55 फीसदी वोट ज्यादा लाकर सत्ता की चाबी हासिल की।
पिछले चार चुनाव में पार्टियों को मिले वोटों का प्रतिशत
2003
कांग्रेस—35.65
भाजपा—39.20
निर्दलीय व अन्य दल—25.15
वोटों का स्विंग—2.38 फीसदी
2008
कांग्रेस—36.82
भाजपा—34.27
निर्दलीय व अन्य दल—28.91
वोटों का स्विंग—2.55 फीसदी
2013
कांग्रेस—33.71
भाजपा—46.05
निर्दलीय व अन्य दल—20.24
वोटों का स्विंग—12.34 फीसदी
2018
कांग्रेस—39.82
भाजपा—39.28
निर्दलीय व अन्य दल—20.90
वोटों का स्विंग—0.54 फीसदी
Published on:
31 Oct 2023 11:40 am
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