
राजस्थान का रण : भाजपा-कांग्रेस ने बदला टिकट का फॉर्मूला, जानें कैसे उतारेंगे दोनों टॉप 400 खिलाड़ी
सुनील सिंह सिसोदिया / अरविन्द शक्तावत / जयपुर. राज्य में भाजपा व कांग्रेस, दोनों दलों के लिए अभी से प्रतिष्ठा का प्रश्न बने विधानसभा चुनाव इस बार खासे रोचक रहने के आसार हैं। दोनों ही दलों ने चुनाव में उम्मीदवार उतारने का फॉर्मूले में कुछ बदलाव किया है। किसी भी सीट पर कोई जोखिम न रहे, इसके लिए दोनों दल जिताऊ उम्मीदवार ढूंढने में जुटे हैं। विधायकों की छवि और उम्मीदवारों के आंकलन के लिए भाजपा तो लगातार सर्वे करा रही है। वहीं, कांग्रेस में उम्मीदवार दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं।
भाजपा का फार्मूला : जिताऊ नामों पर फोकस
भाजपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी जिताऊ उम्मीदवारों के साथ मौजूदा विधायकों के कामकाज को लेकर भी सर्वे करा रही है। विधायकों को लेकर सर्वे का सिलसिला तो सरकार बनने के सालभर बाद से ही शुरू हो गया था। हर छह माह में अंदरपेटे सर्वे कराकर विधायकों की छवि परखी जा रही है। अब चुनाव नजदीक आने के साथ भाजपा विधानसभावार नए उम्मीदवारों के लिए भी जयपुर-दिल्ली दोनों जगह सर्वे करा रही है। मुख्यमंत्री राजस्थान गौरव यात्रा लेकर जिस विधानसभा क्षेत्र में जा रही हैं, वहां भी जिताऊ उम्मीदवार देखे जा रहे हैं।
पार्लियामेंट्री बोर्ड तय करेगा टिकट
पार्टी सूत्रों के मुताबिक टिकट वितरण से पहले पार्टी 5-6 सर्वे कराएगी। इसके बाद सभी सर्वे में विधानसभावार कॉमन नामों को एक किया जाएगा। इन पर पार्लियामेंट्री बोर्ड में चर्चा होगी। इसके बाद एक नाम तय होगा। टिकट वितरण में बड़ी भूमिका पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की रहेगी।
पिछले चुनाव में यह था फार्मूला
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा के दौरान सामने आए उम्मीदवारों में से ही नाम तय किए थे। यात्रा के दौरान विधानसभावार 3-4 नाम लिखे गए थे। यात्रा के बाद जिताऊ उम्मदवारों की समीक्षा कर नाम फाइनल किए गए थे।
नेताओ में संशय, दिल्ली जाएं या जयपुर
हालांकि भाजपा में उम्मीदवार इस संशय में हैं कि टिकट के लिए दिल्ली जाएं या जयपुर में ही सम्पर्क करें। मुख्यमंत्री की भी टिकट वितरण में प्रभावी भूमिका मानी जा रही है लेकिन नेताओं में संशय यह भी है कि इस बार टिकट वितरण में प्रदेश इकाई को पूरी तरह हरी झंडी मिल पाएगी या नहीं।
कांग्रेस का फार्मूला : उम्मीदवार मजबूत हो
टिकट वितरण के लिए प्रदेश कांग्रेस ने अभी तक खास फार्मूला तो नहीं बनाया है लेकिन यह देखा जा रहा है कि उम्मीदवार मजबूत हो। दावेदावरों से फिलहाल कोई आवेदन नहीं लिए गए। नेताओं का कहना है कि क्षेत्र में सक्रिय और मजबूत उम्मीदवार से आवेदन लेने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि इस बार कांग्रेस ने उम्मीदवारों के चयन के लिए ब्लॉक व जिलाध्यक्षों से रिपोर्ट ली थी। इससे पहले विधानसभा कॉर्डिनेटर लगाकर क्षेत्रों के दावेदारों के बारे में और जातिगत आंकड़ों की रिपोर्ट तैयार कराई थी। इन रिपोर्ट और अपने सर्वे के आधार पर ही प्रदेश के चारों सह प्रभारियों ने उम्मीदवारों के नामों के पैनल तैयार किए हैं। वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद पैनल तैयार कर प्रदेश स्क्रीनिंग कमेटी को भेजे गए हैं। अब जल्दी ही स्क्रीनिंग कमेटी की प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक होगी, जिसमें नामों पर चर्चा की जाएगी।
प्रदेश इलेक्शन कमेटी में होगी खानापूर्ति
प्रदेश कांग्रेस की अभी इलेक्शन कमेटी भी नहीं बनी है। यह कमेटी अब जल्दी ही घोषित हो सकती है। इसमें उम्मीदवारों के नामों को लेकर अब सिर्फ खानापूर्ति होगी क्योंकि पैनल तैयार होकर स्क्रीनिंग कमेटी के पास पहुंच चुके हैं।
गत विधानसभा चुनाव में यह रहा फार्मूला
गत विधानसभा चुनाव-2013 में कांग्रेस ने विधानसभावार कोर्डिनेटर लगाकर दावेदारों से आवेदन लिए थे। इसके लिए फार्मेट तैयार किया था। इसमें पार्टी में कब से सदस्य, कौन-कौन से पदों पर रहे, उनके बूथ पर पार्टी को कितने वोट मिले, सामाजिक गतिविधियां, पार्टी के लिए बड़ा काम आदि जानकारियां ली गई थीं। इन आवेदनों के आधार पर पैनल बनाए गए थे। बाद में प्रदेश इलेक्शन कमेटी में चर्चा कर स्क्रीनिंग कमेटी को नाम भेजे गए थे। विधानसभावार आवेदन लेने से कई दिन तक हर विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा रहा था।
नेताओं की दिल्ली दौड़ तेज
कांग्रेस उम्मीदवारों का पैनल दिल्ली स्क्रीनिंग कमेटी के पास पहुंचने के साथ ही प्रदेश के नेताओं की दिल्ली में भागदौड़ तेज हो गई है। पिछले कुछ दिन में स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष कुमारी शैलजा से बड़ी संख्या में प्रदेश के नेताओं ने मुलाकात की। दिल्ली में अन्य बड़े नेताओं के पास भी प्रदेश से रोजाना बड़ी संख्या में नेता पहुंच रहे हैं।
Published on:
15 Sept 2018 06:30 am
