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कांग्रेस को भारी मानते हुए भाजपा ने यहां बदल डाला अपना चेहरा, क्या रंग लाएंगी BJP की आखिरी ‘चाल‘?

Rajasthan Election 2018 को लेकर घमासान पर आखिरकार भाजपा की सूची के साथ एकबारगी तो विराम लग गया। अब इंतजार नाम वापसी के दिन का हो रहा है...

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जयपुर

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Dinesh Saini

Nov 20, 2018

Rajasthan Election 2018

bjp

जयपुर। राजस्थान में टिकटों (Rajasthan Election 2018) को लेकर घमासान पर आखिरकार सोमवार को भाजपा की सूची के साथ एकबारगी तो विराम लग गया। अब इंतजार नाम वापसी के दिन का हो रहा है। उसके बाद ही टिकटों का घमासान शांत हो पाएगा। सोमवार को जारी टिकटों का स्कैन किया। जानिए क्या है इसमें खास..

टोंक : Sachin Pilot को भारी मानते हुए बदल डाला भाजपा ने अपना चेहरा
टोंक से भाजपा ने पहली सूची में वर्तमान विधायक अजीत सिंह मेहता को प्रत्याशी घोषित किया था। मेहता ने पर्चा भी भर दिया था। कांग्रेस में बड़े नेताओं के चुनाव लडऩे के निर्णय के बाद प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के लिए टोंक की सीट चुनी और पहली सूची में वहां से प्रत्याशी घोषित किया। मुस्लिम-गुर्जर बहुल इस सीट कांग्रेस पहले लम्बे समय तक मुस्लिम प्रत्याशी उतारती आई है। पायलट के प्रत्याशी बनने के बाद भाजपा में टोंक पर पुनर्विचार शुरू हुआ। अजीत का पहले ही स्थानीय भाजपा पदाधिकारी विरोध कर रहे थे। जिला पदाधिकारियों ने इस्तीफे भी दिए थे। ऐसे में पार्टी ने मुस्लिम मतदाताओं के मद्देनजर कद्दावर नेता युनूस खान को नामांकन वाले दिन सुबह सुबह टोंक का प्रत्याशी घोषित कर दिया। इससे पहले दो दिन तक प्रदेश स्तर पर इसे लेकर गहन विचार विमर्श चला।

करौली: अंत तक चलती रही जद्दोजहद
आरएसएस लॉबी केवल राज परिवार से ही प्रत्याशी बनाने पर अड़ी थी। जबकि जिला अध्यक्ष राजौरिया, नप सभापति राजाराम आदि भी लाइन में थे। जिलाध्यक्ष व सभापति के बीच तो हाथापाई भी हो गई। राजपरिवार से कभी हां, कभी ना की स्थिति रही। ऐसे में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ओपी सैनी के नाम पर मंथन हुआ और उनके वीआरएस स्वीकृत होने तक इंतजार करने के बाद अन्तिम सूची में सोमवार को प्रत्याशी घोषित किया गया।

बहरोड़: यादव की जिद ने अटकाया टिकट
यहां से टिकट में देर का मुख्य कारण पूर्व सांसद महंत चांदनाथ के शिष्य बालकनाथ की मजबूत दावेदारी था। मौजूदा विधायकों के अधिकतर के टिकट काटे गए लेकिन विधायक जसवंत यादव बेटे को टिकट दिलाने में सफल हो गए। एक धड़े का अंत तक तर्क था कि खुद जसवंत ही चुनाव लड़ें। जबकि जसवंत बेटे के टिकट के लिए अड़े रहे। राज्य का शीर्ष नेतृत्व जसवंत की बात के पक्ष में रहा और अंतत: मोहित का नाम घोषित हुआ

खेरवाड़ा: नानालाल पर दया की, वजह बन गए ‘दयाराम’
अंतिम दिन भाजपा ने प्रत्याशी बदलते हुए विधायक नानालाल अहारी पर ही दावं खेला। नाना का टिकट कटने पर खेरवाड़ा-ऋषभदेव क्षेत्र में विरोध हो गया। छह में से चार मंडल नाना के साथ खड़े हो गए। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री दयाराम परमार को उतारा तो भाजपा ने नाना समर्थकों के विरोध और दयाराम को भारी प्रत्याशी मानते हुए पुनर्विचार किया। पार्टी ने तय किया कि दयाराम के सामने नानालाल भारी उम्मीदवार होंगे।

डीडवाना: ‘आनंदपाल’ और युनूस ने दिलाया
लोक निर्माण मंत्री युनूस खान मौजूदा विधायक हैं। वह यहीं से चुनाव लडऩा चाहते थे जबकि संगठन ने आरएसएस के प्रभाव में उन्हें इस सीट से नहीं उतारा। इसीलिए टिकट की घोषणा ऐन वक्त पर की गई। यहां से युनूस खान के चहेते जितेन्द्र सिंह जोधा को टिकट दिया गया है। जो राजपूत वोट बैंक को साधने और आनंदपाल इफेक्ट को कम करने के लिहाज से तय हुआ है। जितेन्द्र सिंह आनंदपाल के गांव सांवराद का ही रहने वाला है।

खींवसर: योग्य की तलाश से हुआ विलंब
यह रालोपा के संयोजक हनुमान बेनीवाल की सीट है। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए जिताऊ उम्मीदवार को उतारना चुनौती होता है। योग्य उम्मीदवार की तलाश में ही देरी हुई। अंत में भाजपा शहर जिलाध्यक्ष रामचंद्र उत्ता को प्रत्याशी बनाया गया है। यहां से हनुमान बेनीवाल की भतीजी अनीता बेनिवाल भी भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रही थी। कांग्रेस ने भी अपना टिकट काफी लंबी खींचतान के बाद जारी किया है।

कोटपूतली : गोयल और पटेल की रस्साकशी के कारण सूची में हुई देर
यहां मुकेश गोयल एवं हंसराज पटेल के नाम पर रस्साकशी चल रही थी। भाजपा में शीर्ष नेतृत्व की भी दो राय थी। गोयल के पक्ष में संघ कार्यकर्ता लामबंद थे। पटेल को इसलिए टिकट नहीं मिला क्योंकि कोटपूतली से पूर्व संसदीय सचिव रामस्वरूप कसाना भी मैदान में हैं। इससे गुर्जर वोट बंटने की आशंका में गोयल पर सहमति बनी। कोट पूतली के कारण रविवार रात जारी होने वाली सूची सोमवार सुबह तक टली।

केकड़ी: अंतिम समय में पत्ता खोला तो विनायका की निकली लॉटरी
भाजपा ने मंगलवार सुबह आखिरी सूची में अजमेर जिले की हॉट सीट बनी केकड़ी सीट पर अंतिम समय में पत्ता खोला है। विधायक व संसदीय सचिव शत्रुघ्न गौतम का टिकट काटकर वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व देते हुए राजेन्द्र विनायका पर दावं खेला है। कांग्रेस ने यहां से पहली सूची में सांसद एवं पूर्व विधायक डॉ. रघु शर्मा को प्रत्याशी घोषित कर दिया था। शर्मा ने यहां से लोकसभा उपचुनाव में बढ़त ली थी। आखिरकार यहां से वैश्य कार्ड खेला गया है।