
जयपुर। सांसद सीपी जोशी के रूप में भाजपा को नया प्रदेशाध्यक्ष मिल गया है। पार्टी ने एक बार फिर चुनावी साल में प्रदेशाध्यक्ष बदला है। पार्टी को इससे जीत भी मिली है और हार का भी सामना करना पड़ा है। इस बार भी नए प्रदेशाध्यक्ष के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं। सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में चल रही खेमेबाजी को खत्म करना है।
राजस्थान भाजपा के इतिहास पर नजर डाली जाए तो 2003 से लगातार चुनावी साल में प्रदेशाध्यक्ष बदलने का ट्रेंड चल रहा है। 2003 के विधानसभा चुनाव के समय वसुंधरा राजे की जगह ललित किशोर चतुर्वेदी को भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। उस समय भाजपा को जीत मिली थी। इसके बाद 2008 के विधानसभा चुनाव में महेश चंद शर्मा को हटाकर ओम प्रकाश माथुर को कमान दी गई। हालांकि भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
प्रदेशाध्यक्ष रहते एकमात्र सीएम बनी राजे
2013 के विधानसभा चुनाव हुए तब अरुण चतुर्वेदी की जगह वसुंधरा राजे को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंपी गई। इस चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत से जीत मिली। वसुंधरा राजे भाजपा की एकमात्र नेता हैं जो प्रदेशाध्यक्ष रहते राजस्थान की सीएम बनी हैं।
2018 में फिर बदला प्रदेशाध्यक्ष
2018 में विधानसभा चुनाव से पहले अशोक परनामी को हटाकर मदन लाल सैनी को भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। इस साल भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। अब फिर चुनावी साल में सीपी जोशी को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में चुनाव परिणाम पर सबकी नजरें रहेंगी।
चुनावी साल में ये बने प्रदेशाध्यक्ष
ललित किशोर चतुर्वेदी—2003
ओमप्रकाश माथुर—2008
वसुंधरा राजे—2013
मदन लाल सैनी—2018
सीपी जोशी—2023
Updated on:
23 Mar 2023 02:11 pm
Published on:
23 Mar 2023 01:52 pm
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