29 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan Politics : कहीं राजस्थान में ना हो जाता उत्तर प्रदेश जैसा भयानक हादसा ! क्या महिला नेत्रियों पर इसलिए ‘तिलमिलाए’ BJP प्रदेशाध्यक्ष?

जयपुर में भाजपा महिला मोर्चा के मशाल जुलूस के दौरान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का गुस्सा और उनका अचानक कार्यक्रम छोड़ना अब एक बड़ी वजह के साथ सामने आ रहा है।

2 min read
Google source verification
Madan Rathore

Madan Rathore

राजनीति में कभी-कभी 'गुस्सा' किसी बड़ी अनहोनी को टालने का जरिया बन जाता है। जयपुर के अमर जवान ज्योति पर मंगलवार रात भाजपा महिला मोर्चा के मशाल जुलूस के दौरान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का जो रौद्र रूप दिखा, उसके पीछे की परतें अब खुलने लगी हैं। मदन राठौड़ का महिला नेत्रियों पर चिल्लाना और बीच में ही कार्यक्रम छोड़कर जाना महज 'अव्यवस्था' पर नाराजगी नहीं थी, बल्कि इसके पीछे उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुई एक दर्दनाक घटना का डर छिपा था।

यूपी में झुलस गईं महिला विधायक

महज कुछ ही दिन पहले उत्तर प्रदेश के बहराइच में भाजपा की वरिष्ठ नेत्री और विधायक अनुपमा जायसवाल एक बड़े हादसे का शिकार हो गईं। 'नारी शक्ति वंदन अभियान' के तहत पुतला दहन करते समय अचानक आग की लपटें उनके चेहरे पर आ गईं, जिससे उनका चेहरा और बाल झुलस गए। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल भर्ती कराना पड़ा।



इस घटना ने देशभर में भाजपा कार्यकर्ताओं को झकझोर दिया कि प्रदर्शन के दौरान 'आग' के साथ लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है।

VIDEO में देखें : यूपी में अचानक कैसे हुआ हादसा?

जयपुर में राठौड़ की चिंता !

जब जयपुर में महिला मोर्चा की मशालें जलीं, तो मदन राठौड़ को शायद वही यूपी वाला मंजर याद आ गया।

  • लापरवाही की इंतहा: जलती मशालों के बीच महिला नेत्री और कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा तोड़कर एक-दूसरे के करीब आकर सेल्फी ले रही थीं।
  • चेतावनी को किया अनसुना: मदन राठौड़ लगातार फासला बनाने की अपील कर रहे थे, लेकिन जब उनकी बातें अनसुनी हो रही थीं तो राठौड़ का सब्र टूट गया।
  • हादसा टालने का कड़ा कदम: शायद राठौड़ को डर था कि अगर एक भी मशाल किसी के कपड़ों या चेहरे के करीब पहुंची, तो राजस्थान में भी यूपी जैसा 'अग्निकांड' हो सकता है। इसी 'चिंता' और 'नाराजगी' के मिश्रण ने उन्हें मंच छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

VIDEO में देखें : कैसे आया मदन राठौड़ को गुस्सा?

अव्यवस्थाओं ने बढ़ाई अध्यक्ष की 'टेंशन'

अनुशासन के लिए जानी जाने वाली भाजपा में इस तरह की अव्यवस्था मदन राठौड़ को चुभ गई।

सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां: मशाल जुलूस में मशालों के बीच कम से कम 3-4 फीट की दूरी अनिवार्य होती है, जिसे जयपुर में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

संगठन की किरकिरी: भीड़ कम होने और बड़े नेताओं के फोटो खिंचवाने की होड़ ने इस गंभीर प्रदर्शन को महज एक 'फोटो-ऑप' बना दिया, जिससे अध्यक्ष का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया।

    राजनीतिक विश्लेषण: 'बचाव' या 'बदनामी'?

    मदन राठौड़ के गुस्से को अब राजनीतिक गलियारों में 'अनुशासन' और 'जीवन रक्षा' के नजरिए से देखा जा रहा है। यदि राठौड़ वहां सख्ती नहीं दिखाते और कोई छोटी सी चिंगारी भी किसी बड़ी अनहोनी का सबब बनती, तो जवाबदेही प्रदेश अध्यक्ष की ही होती। यूपी की घटना ने भाजपा को सिखा दिया है कि 'आग' के साथ राजनीति और लापरवाही का मेल जानलेवा है।