
राजस्थान लोकसभा चुनाव में प्रदेश के सात विधायकों ने सांसद का चुनाव लड़ा। जिनमें से 5 विधायकों को जनता ने अपना आशीर्वाद दिया। जिससे विधानसभा की खाली हुई इन पांच सीटों पर नवंबर माह में उपचुनाव होना है। जिसे लेकर राजनीतिक पार्टियों ने तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस ने इन सीटों पर चार-चार सदस्यीय कमेटी गठित की है।
वहीं, प्रदेश में रिक्त हुई पांच विधानसभा सीटों पर नवंबर माह में होने वाले उपचुनावों में इस बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी अपने प्रत्याशी उतारेगी। संभवतः ये पहली बार है जब बसपा उपचुनाव लड़ेगी, आमतौर पर पार्टी उपचुनाव में अपने प्रत्याशी नहीं उतारती है।
बसपा के प्रदेशाध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने कहा कि पार्टी अब झुंझुनूं, दौसा, देवली उनियारा, खींवसर और चौरासी विधानसभा सीट पर उपचुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही नवंबर माह में होने वाले नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं के चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतारेगी।
राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में बसपा के चुनाव लड़ने से भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही नुकसान होने वाला है। जबकि अधिक नुकसान कांग्रेस को होगा। क्योंकि बसपा अधिकतर सीटों पर अल्पसंख्यकों के साथ-साथ दलितों को टिकट दे सकती है। जिससे अल्पसंख्यक और दलित वोट कांग्रेस से हटकर बसपा में जा सकते है। जिससे भाजपा को फायदा संभव है।
बता दें कि राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के हाल ही में दिए बयान से कयास लगाए जा रहे है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव की तर्ज पर विधानसभा चुनाव भी गठबंधन के साथ मिलकर लड़ सकती है। जिससे बसपा के भारी नुकसान पहुंचाने की उम्मीद है।
Published on:
26 Jun 2024 12:15 pm

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