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राजस्थान निकाय चुनाव: जानिए 1 वोट की ताकत से कैसे बदलेगा आपके शहर का भविष्य; सवाल पूछिए, हिसाब मांगिए फिर कीजिए मतदान

राजस्थान में नगर निकाय और पंचायती राज चुनाव जनप्रतिनिधि के साथ स्थानीय विकास तय करने का मौका है। विधायक-सांसद नीति बनाते हैं, पर पार्षद और सरपंच पानी, सड़क व सफाई की समस्याएं हल करते हैं। इस बार जाति-धर्म से ऊपर उठकर कार्यकुशल उम्मीदवार चुनें।
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जयपुर

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Arvind Rao

Aug 21, 2026

rajasthan civic polls your one vote can shape your city future

राजस्थान स्थानीय निकाय चुनाव: 1 वोट की ताकत, 5 साल का असर (पत्रिका फाइल फोटो)

Rajasthan Municipal Elections 2026: चुनाव सिर्फ जनप्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं, अपने शहर, गांव और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करने का मौका भी है। लेकिन हमारी चुनाव प्रणाली किसी से छिपी नहीं है। हर साल दो साल में कोई न कोई चुनाव हमारी पहचान बन चुके हैं। राजनीतिक दल भले ही अपने घोषणा पत्रों में स्वच्छ राजनीति की बात करते हैं, लेकिन चुनावी नगाड़ा बजते ही धर्म, जाति, धनबल, बाहुबल और वंशवाद हावी हो जाता है।

आमजन पूरे पांच साल जिन समस्याओं से परेशान रहता है, वे मुद्दे राजनीतिक दलों के शोर में दबकर नहीं रह जाएं, इसकी जिम्मेदारी हम सबकी है। अच्छे लोग सुधार करना चाहते हैं, लेकिन राजनीति में आने से संकोच करते हैं। राजस्थान पत्रिका ने 2018 के विधानसभा चुनाव में राजनीति में शुद्धता लाने के लिए जनप्रहरियों को अपने साथ जोड़ा था।

प्रदेश भर में 4 हजार 324 जनप्रहरी अपने-अपने क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में जुटे हैं। अब जरूरी है कि हम एक-दूसरे को दोष देने के बजाय अपनी जिम्मेदारी समझें और अच्छे जनप्रतिनिधि चुनें। इसके लिए यही सही वक्त है…तो आइए…सही चुनें।

राजस्थान में नगर निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव लोकतंत्र का महज एक चुनावी उत्सव नहीं हैं। यह वह मौका है, जब गांव की सड़क से लेकर शहर की सफाई, पानी से लेकर नालियों तक, स्ट्रीट लाइट से लेकर कचरा प्रबंधन और स्थानीय विकास की प्राथमिकताएं तय करने का अधिकार सीधे जनता के हाथ में आता है।

विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हम सरकार चुनते हैं, लेकिन स्थानीय चुनाव में हम अपने आसपास की सरकार चुनते हैं। इसलिए इन चुनाव को छोटा समझना सबसे बड़ी भूल होगी। विधायक और सांसद बड़े नीतिगत फैसलों की आवाज बनते हैं। जबकि पार्षद, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य रोजमर्रा की उन समस्याओं से सीधे जुड़े होते हैं, जिनका असर आम आदमी के जीवन पर पड़ता है। इस बार मतदाता के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होना चाहिए कि प्रत्याशी किस पार्टी का है? सवाल यह होना चाहिए कि कौन हमारे गांव या शहर को बेहतर बनाने की क्षमता, ईमानदारी और इच्छाशक्ति रखता है?

पहले यह समझें, इन चुनावों का क्या मतलब है?

नगर निकाय…आपके शहर की सरकार: नगरपालिका, नगर परिषद और नगर निगम शहर के दैनिक जीवन से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण संस्थान हैं। सड़क, नाली, सफाई, कचरा संग्रहण, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक सुविधाएं, पार्क, अतिक्रमण, शहरी नियोजन और स्थानीय स्तर की कई नागरिक सेवाओं का सीधा संबंध निकायों से है।

पंचायतीराज…गांव विकास की पहली सीढ़ी: ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। गांव की मूलभूत सुविधाओं, स्थानीय विकास, सार्वजनिक परिसंपत्तियों, स्वच्छता, पानी, सड़कों और सरकार की अनेक योजनाओं के क्रियान्वयन में इन संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। गांव का चुनाव केवल सरपंच चुनने का चुनाव नहीं है। यह तय करने का चुनाव है कि अगले पांच साल गांव की प्राथमिकताएं कौन तय करेगा।

बदलाव की तस्वीर पत्रिका जनप्रहरियों की बढ़ती साख

जन प्रहरी अब केवल जनता की समस्याओं को सामने रखने तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि स्थानीय राजनीति में अपनी मजबूत दस्तक भी दे रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में इनका नेटवर्क लगातार बढ़ा है और बड़ी संख्या में युवा इससे जुड़ रहे हैं। इसका असर चुनावी राजनीति में भी दिखाई दिया है। विधानसभा से लेकर पंचायत चुनाव तक जनप्रहरियों ने चुनावी मैदान में उतरकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई और कई ने जीत हासिल कर स्थानीय सत्ता में जगह बनाई। ऐसे में जनप्रहरियों की बढ़ती सक्रियता अब जमीनी राजनीति में बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रही है।
गांवों और कस्बों में स्थानीय मुद्दों को उठाने से लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने सवाल रखने तक इनकी भूमिका लगातार विस्तृत हुई है। इसी वजह से कई क्षेत्रों में वे जनता और राजनीतिक दलों के बीच एक प्रभावी कड़ी के रूप में भी उभर रहे हैं।

सर्वे: गंदगी से पूरा प्रदेश परेशान

राजस्थान पत्रिका ने आम लोगों की समस्याएं जानने के लिए राज्य में सर्वे कराया गया है, जिसमें सभी जिलों के हर वर्ग के नागरिकों ने भाग लिया। सर्वे में यह बात सामने आई है कि सबसे ज्यादा लोग गंदगी से परेशान हैं। इसके बाद जर्जर सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण, सीवरेज और जल निकासी जैसी समस्याओं ने जनता को बेहाल किए रखा है। इंदौर लगातार आठ बार से स्वच्छता में देश में अव्वल है। घर-घर कचरा संग्रहण, कचरे का शत-प्रतिशत निपटान के साथ स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ा है। अब यही पहल हमें हमारे प्रदेश, शहर, कस्बों और गांवों तक ले जानी है।

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