
Rajasthan CM Bhajan Lal 1930 Cyber Helpline Review
राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर के रहने वाले एक ग्रामीण भैराराम के मोबाइल फोन पर जब शनिवार को जयपुर से एक कॉल आई, तो वह हैरान रह गया। 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाने वाले भैराराम से फोन की दूसरी तरफ कोई आम पुलिसकर्मी नहीं, बल्कि खुद राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बात कर रहे थे। दरअसल, मुख्यमंत्री जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में नवगठित राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। इसी दौरान बाड़मेर से भैराराम का लाइव कॉल सिस्टम पर फ्लैश हुआ, जिसे मुख्यमंत्री ने खुद अटेंड किया।
भैराराम ने मुख्यमंत्री को बताया कि कैसे इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स बढ़ाने के एक शॉर्टकट झांसे में आकर वह साइबर ठगों की जालसाजी का शिकार हो गया और उसके खाते से पैसे उड़ा लिए गए। मुख्यमंत्री ने भैराराम से पूरी बातचीत कर ढांढस बंधाया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया के जरिए जाल में फंसाने वाले इन अपराधियों को पाताल से भी ढूंढ निकाला जाए। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित की कंप्लेंट दर्ज होने से लेकर संबंधित थाने और बैंक को सूचना भेजने की पूरी लाइव डिजिटल ट्रैकिंग कार्यप्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के बजट 2026-27 में साइबर अपराध पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) के गठन के लिए 100 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया है।
मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान R4C के बेहतर संचालन के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एक नया स्वतंत्र भवन उपलब्ध करवाने के निर्देश गृह विभाग को जारी कर दिए हैं।
साथ ही मुख्यमंत्री ने पुलिस के उच्च अधिकारियों को कहा कि केवल साइबर ठगों की गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनकी अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों को भी कुर्क करने की कठोर वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाए।
साइबर ठगी के इस पूरे नेक्सस को तोड़ने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बहुत ही सख्त नीतिगत निर्देश दिया है। अक्सर देखा जाता है कि ठग दूसरों के खातों में पैसा ट्रांसफर करवाते हैं। अब राजस्थान में जो भी व्यक्ति चंद रुपयों के लालच में आकर साइबर अपराधियों को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या सिम कार्ड इस्तेमाल करने के लिए देगा, उसे भी उतना ही दोषी माना जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर जेल भेजा जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 1930 हेल्पलाइन पर फिलहाल 95 प्रतिशत शिकायतें समय पर दर्ज हो रही हैं। पहले जहां केवल 30 लाइनों पर कॉल सुने जा रहे थे, वहीं अब इसे बढ़ाकर 53 लाइंस कर दिया गया है जो 3 शिफ्टों में काम कर रही हैं। बहुत जल्द इसे 60 लाइनों में अपग्रेड कर दिया जाएगा ताकि कोई भी कॉल पेंडिंग न रहे।
साइबर ठगी के पैसे को 'गोल्डन आवर्स' (शुरुआती 1 से 2 घंटे) के भीतर फ्रीज करने के लिए बैंकिंग सिस्टम का मुस्तैद होना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसी समन्वय को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद आगामी 21 जुलाई को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्पेशल स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (SLBC) की एक बैठक बुलाई गई है।
इस बैठक में राजस्थान के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों के टॉप मैनेजमेंट अधिकारी शामिल होंगे, ताकि साइबर हेल्पलाइन से सूचना मिलते ही महज 5 मिनट के भीतर ठगों के बैंक खातों को पूरी तरह ब्लॉक किया जा सके।
जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में 5 लाख रुपये से अधिक की बड़ी साइबर धोखाधड़ी के मामलों में अब तक 412 ई-जीरो एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके अलावा गृह मंत्रालय द्वारा डिजिटल सुरक्षा और रिसर्च के लिए वर्ष 2026 में राजस्थान के 54 चुनिंदा पुलिस कर्मियों को विशेष ट्रेनिंग के लिए भी चुना गया है।
पुलिस मुख्यालय वर्तमान में ऑपरेशन वज्र प्रहार, ऑपरेशन साइबर शील्ड, ऑपरेशन एन्टी वायरस और ऑपरेशन म्यूल हंटर जैसे विशेष अभियान चलाकर हजारों की संख्या में फर्जी सिम और आईएमईआई (IMEI) ब्लॉक कर रहा है।
Updated on:
19 Jul 2026 08:13 am
Published on:
19 Jul 2026 08:13 am
