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Jaipur News: गैंगस्टर से लेकर लश्कर के आतंकी तक, क्यों बदमाशों के लिए ‘सेफ ज़ोन’ बन रही पिंकसिटी?

Jaipur Safe Zone: देशभर के शातिर अपराधियों के लिए जयपुर सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। किरायेदार सत्यापन में लापरवाही, तेजी से बढ़ती कॉलोनियां और आसान रेंटल सिस्टम अपराधियों के लिए मददगार साबित हो रहे हैं।
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जयपुर

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Harshita Saini

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ललित तिवारी, विजय शर्मा

Jul 19, 2026

Gangster Network Jaipur

जयपुर बन रहा सभी आतंकियों के लिए सेफ ज़ोन (Photo-AI Generated)

Gangster Network Jaipur: गुलाबी नगरी का जो शांत मिजाज, महफूज माहौल और सांस्कृतिक विरासत कभी उसकी सबसे बड़ी पहचान हुआ करते थे, आज वही जयपुर देश-प्रदेश के शातिर अपराधियों के लिए सबसे मुफीद ठिकाना बनता जा रहा है। पुलिस के हालिया आंकड़े और फाइलों में दर्ज मामले इस चौंकाने वाले और कड़वे सच की गवाही दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और यहां तक कि पड़ोसी देश नेपाल तक के शातिर बदमाशों ने अब जयपुर को अपनी सुरक्षित पनाहगाह (शरणगाह) बना लिया है। दरअसल, शहर का तेजी से होता शहरीकरण, बिना किसी पुख्ता जांच-पड़ताल के आसानी से मिलने वाले फ्लैट्स व पेइंग गेस्ट आवास इन बाहरी अपराधियों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन रहे हैं। 'किरायेदार सत्यापन का अभाव' सबसे कमजोर कड़ी साबित हो रहा है।

विशेषज्ञों का नजरिया

जयपुर एक मेट्रो सिटी की तरह फैल रहा है। ऐसे में हमें 'ट्रेडिशनल पुलिसिंग' से हटकर 'स्मार्ट डिजिटल पुलिसिंग' अपनानी होगी। बीट कांस्टेबलों को अपने क्षेत्र के हर मकान की जानकारी होनी चाहिए। साइबर सेल को और अधिक मजबूत करना समय की मांग है।

  • अनिल गोठवाल, पूर्व आरपीएस अधिकारी

पारंपरिक चोरी से लेकर डार्कवेब और हनीट्रैप तक - 4 मुख्य पॉइंट

  1. हनीट्रैप और डेटिंग ऐप ब्लैकमेलिंग: सुंदर चेहरों और फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स के जरिये शहर के रसूखदार और अमीर लोगों को जाल में फंसाया जाता है। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिये अश्लील वीडियो या तस्वीरें लाखों रुपये की मोटी उगाही की जाती है।
  2. संगठित ठग और अवैध हथियारों की तस्करी: युवाओं, विशेषकर यूनिवर्सिटी और कोचिंग एरिया (जैसे गोपालपुरा, प्रताप नगर, मानसरोवर) में सिंथेटिक ड्रग्स और अवैध हथियारों की सप्लाई के लिए बाहरी राज्यों के पैडलर्स सक्रिय हैं।
  3. रंगदारी और फायरिंग: सोशल मीडिया के जरिये गैंगस्टर्स स्थानीय युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। जयपुर के बड़े व्यापारियों, ज्वेलर्स और बिल्डर्स को धमकी भरे फोन कर करोड़ों की रंगदारी मांगना और फायरिंग करवाना आम हो चुका है।
  4. लग्जरी लाइफस्टाइल की चाह: पुलिस गिरफ्त में आए अधिकांश आरोपी 18 से 25 वर्ष के युवक हैं, जो केवल अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल, महंगे शौक, पब-क्लब संस्कृति की चाह में अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं।

सरहदें पार कर जयपुर पहुंचे अपराधी: पिछले कुछ समय में सामने आए ये प्रमुख 10 मामले कर रहे पुष्टि

  1. लश्कर के आतंकी 'खरगोश' का ठिकाना: जयसिंहपुरा खोर में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकी उमर हारिस उर्फ 'खरगोश' करीब एक साल तक फर्जी दस्तावेज के आधार पर पहचान बदलकर रहा।

खामी: किरायेदार, पहचान पत्रों के सत्यापन में लापरवाही।

समाधान: बीट कांस्टेबल नियमित सत्यापन करें और संदिग्ध व्यक्तियों की डिजिटल मॉनिटरिंग हो।

  1. अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट (9 जून 2026): खोह नागोरियान में अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाके के बाद पुलिस ने गाजियाबाद निवासी फिरोज को दबोचा।

खामी: संयुक्त निगरानी का अभाव।

समाधान: रिहायशी क्षेत्रों में निरीक्षण और अवैध इकाइयों पर तत्काल कार्रवाई हो।

  1. यूट्यूब से सीखी एटीएम बूथ काटने की कला (मई 2026): मुरलीपुरा पुलिस ने झारखंड, दिल्ली के दो आरोपियों को पकड़ा।

खामी: संवेदनशील एटीएम पर सुरक्षा और अलार्म सिस्टम पर्याप्त नहीं थे।

समाधान: सभी एटीएम पर हाई-सिक्योरिटी सेंसर, अलार्म होने चाहिए।

  1. पंजाब की चेन स्नेचर गैंग: सोडाला पुलिस ने पटियाला के दो शातिर स्नेचर्स को पकड़ा, जिन्होंने शहर में ताबड़तोड़ वारदात की।

खामी: निगरानी पर्याप्त नहीं।

समाधान: सादा वर्दी में पुलिस, सीसीटीवी और लगातार गश्त बढ़ाई जाए।

  1. एटीएम हेल्पर गैंग (26 अप्रैल 2026): झोटवाड़ा पुलिस ने मेवात, दिल्ली, यूपी के बदमाशों को पकड़ा। मदद के बहाने कार्ड बदलकर पैसे निकाल लेते थे।

खामी: एटीएम बूथों की सुरक्षा और निगरानी कमजोर रही।

समाधान: पुलिस गश्त, बैंक सुरक्षा और मुखबिर तंत्र को मजबूत किया जाए।

  1. हाईटेक गुलेल गैंग (25 अप्रैल 2026): जवाहर नगर से बिहार और तमिलनाडु के बदमाश गाड़ी में रखा बैग और कीमती जेवर चुरा ले गए थे।

खामी: अंतरराज्यीय अपराधियों की गतिविधियों पर निगरानी नहीं थी।

समाधान: होटल सत्यापन और अंतरराज्यीय गैंग का साझा पुलिस डाटाबेस तैयार किया जाए।

  1. मध्य प्रदेश की 'रेकी और रन' गैंग (दिसंबर-25): एमपी के बदमाश जयपुर के होटलों में रुकते, रेकी कर चोरी करते।

खामी: होटल में ठहरने वालों का प्रभावी सत्यापन नहीं हुआ।

समाधान: होटल रिकॉर्ड की नियमित जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।

  1. डॉक्टर को ट्रेडिंग पोर्टल के जाल में फंसाकर 3.81 करोड़ की चपत: जयपुर के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर से ठगी के मामले में नागपुर के साइबर क्रिमिनल को गिरफ्तार किया।

खामी: साइबर जागरूकता और रोकथाम तंत्र कमजोर रहा।

समाधान: संदिग्ध लेन-देन पर तत्काल कार्रवाई हो।

  1. नेपाल कनेक्शन वाली घरेलू लूट: कानोता बाग में एक बुजुर्ग महिला को बंधक बनाकर लूटा।

खामी: घरेलू नौकरों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया।

समाधान: अनिवार्य पुलिस सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।

  1. गैंगस्टर नेटवर्क की फायरिंग: जी क्लब में फायरिंग, गैंगस्टर्स लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा के नेटवर्क की सक्रियता का पता चला। इस वारदात के तार उत्तराखंड, चूरू और बीकानेर से जुड़े थे।

खामी: खुफिया निगरानी और समन्वय कमजोर रहा।

समाधान: राज्यों के बीच इंटेलिजेंस साझा होना चाहिए।

जयपुर क्यों है गढ़, ये हैं कारण

  1. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, एनएच-8 और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की वजह से जयपुर देश के किसी भी कोने से चंद घंटों में जुड़ जाता है। अपराधी दिल्ली, हरियाणा या यूपी से आकर वारदात करते हैं और पुलिस के नाकाबंदी करने से पहले राज्य की सीमा पार कर जाते हैं।
  2. जगतपुरा, खोह नागोरियान, मुहाना, जयसिंहपुरा खोर और अजमेर रोड जैसे बाहरी इलाकों में तेजी से कॉलोनियां बस रही हैं। इन इलाकों में स्थानीय थानों की गश्त न के बराबर है, जिससे अपराधियों को छिपने का सुरक्षित माहौल मिलता है।
  3. सस्ता और आसान रेंटल सिस्टम: जयपुर में बिना किसी पहचान पत्र या बिना पुलिस वेरिफिकेशन के आसानी से फ्लैट और कमरा किराए पर मिल जाता है। मकान मालिकों को सिर्फ अपने किराए से मतलब होता है, वे सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रख देते हैं।

जयपुर पुलिस से सवाल-जवाब
ओमप्रकाश, स्पेशल कमिश्नर (ऑपरेशंस)

Q. जयपुर बाहरी राज्यों के अपराधियों का गढ़ बन चुका है?

जवाब: हम अपराधियों के खिलाफ बेहद सख्त हैं। शहर में बाहरी बदमाशों की धरपकड़ के लिए लगातार 'एरिया डोमिनेशन' अभियान चलाया जा रहा है।

Q. अपराध तो बढ़ते ही जा रहे हैं?

जवाब: सभी थानाधिकारियों और बीट प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में रहने वाले हर नए और संदिग्ध व्यक्ति का भौतिक सत्यापन करें। जनता को भी सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस का सहयोग करना चाहिए।

यह करें नागरिक

  • बिना जांचे-परखे किसी भी किराएदार को केवल ज्यादा किराए के लालच में मकान न दें।
  • पड़ोस में किसी फ्लैट या मकान में संदिग्ध लोगों का आना-जाना है या रात के समय असामान्य गतिविधियां दिखती हैं, तो तुरंत स्थानीय बीट कांस्टेबल या पुलिस कंट्रोल रूम (100/112) को सूचना दें। आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
  • ज्ञात डेटिंग ऐप या सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट के झांसे में न आएं। वित्तीय लेन-देन हमेशा सत्यापित स्रोतों से ही करें।

जरूरी हैं यह कदम

  • अनिवार्य ऑनलाइन पुलिस सत्यापन: राज्य सरकार को एक ऐसा कड़ा कानून बनाना चाहिए, जिसके तहत बिना 'पुलिस वेरिफिकेशन' के किराएदार रखने पर मकान मालिक पर भारी जुर्माने और सजा का प्रावधान हो। इसके लिए 'राजकॉर्प' ऐप को और सरल व सुलभ बनाया जाए।
  • राजस्थान पुलिस को पड़ोसी राज्यों (हरियाणा, यूपी, पंजाब, एमपी) की पुलिस के साथ मिलकर एक 'साझा क्रिमिनल डेटाबेस' तैयार करना चाहिए, ताकि संदिग्धों की तुरंत पहचान हो सके।
  • मुहाना, प्रताप नगर, और मालवीय नगर जैसे छात्र बाहुल्य क्षेत्रों में चल रहे सभी पीजी और हॉस्टल्स का जिला प्रशासन की ओर से औचक निरीक्षण होना चाहिए।