
Rajasthan RPSC Senior Teacher Exam - AI PIC
राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर (RPSC) द्वारा आयोजित वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2025 का जयपुर जिले में 12 जुलाई से 18 जुलाई तक आयोजन तो पूरा हो गया, लेकिन इसके सरकारी आंकड़े एक गंभीर और चौंकाने वाली कहानी बयां कर रहे हैं। जयपुर ज़िले के 174 परीक्षा केंद्रों पर हुई परीक्षा के लिए लगभग 3 लाख अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन किया था, लेकिन धरातल पर नजारा कुछ और ही था। इस पूरी परीक्षा अवधि के दौरान लगभग 1 लाख 38 हजार रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स एग्जाम सेंटर तक पहुंचे ही नहीं, जिसके चलते सभी पारियों में औसत उपस्थिति महज 54 प्रतिशत के आसपास ही सिमट कर रह गई। किसी भी बड़ी राज्य स्तरीय शिक्षक भर्ती में लगभग 46 प्रतिशत अभ्यर्थियों का परीक्षा छोड़ देना शिक्षा जगत के एक्सपर्ट्स और नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बन गया है।
एक तरफ जहां युवाओं में सरकारी नौकरी के लिए भारी होड़ मची रहती है, वहीं दूसरी तरफ इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का एग्जाम से दूरी बना लेना प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली की अंदरूनी हकीकत पर कई तीखे सवाल खड़े करता है।
अगर विषयवार आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो पता चलता है कि कठिन माने जाने वाले विषयों और क्षेत्रीय भाषाओं में छात्रों का मोहभंग सबसे ज्यादा देखा गया।
प्रमुख विषयों की स्थिति: 12 जुलाई को सामान्य ज्ञान में 35,774 और सामाजिक विज्ञान में 35,277 छात्र आए। 13 जुलाई को हिंदी में 28,614 छात्र बैठे, जबकि 14 जुलाई को विज्ञान विषय में यह संख्या घटकर केवल 18,937 रह गई। सबसे बड़ी गिरावट 16 जुलाई को देखने को मिली जब गणित विषय की परीक्षा में केवल 12,359 अभ्यर्थी ही सेंटर पहुंचे।
क्षेत्रीय भाषाओं का हाल: 17 और 18 जुलाई 2026 को आयोजित हुई क्षेत्रीय भाषाओं की परीक्षा में उपस्थिति बेहद निराशाजनक रही। अंग्रेजी में 7,720, उर्दू में 437, पंजाबी में 125, सिंधी में 55 और गुजराती विषय के लिए पूरे जयपुर जिले में केवल 12 अभ्यर्थी ही एग्जाम रूम तक पहुंचे।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार को इन खाली सीटों को भरना है, तो परीक्षा प्रणालियों को समयबद्ध और अधिक छात्र-अनुकूल बनाना होगा, वरना युवाओं का सरकारी सिस्टम से भरोसा पूरी तरह उठ सकता है।
लगभग 1 लाख 38 हजार रजिस्टर्ड कैंडिडेट्स की 'रिकॉर्ड' गैर-हाजिरी के कई संभावित कारण गिनाए जा रहे हैं, जिनमें से दो कारण प्रमुखता से उभरकर सामने आते हैं।
लगातार टलती परीक्षाओं से बढ़ता मानसिक तनाव: वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2025 का आयोजन साल 2026 के मध्य में हो रहा है। परीक्षाओं के नोटिफिकेशन जारी होने से लेकर फाइनल एग्जाम होने के बीच का लंबा अंतराल ग्रामीण क्षेत्र के गरीब छात्रों पर भारी पड़ता है।
जयपुर, कोटा या जोधपुर जैसे शहरों में रहकर 2 से 3 साल तक कोचिंग और कमरे का किराया वहन करना हर परिवार के बस की बात नहीं होती, जिससे थक-हारकर कई छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।
प्राइवेट सेक्टर और स्टार्टअप की तरफ बढ़ता झुकाव: राजस्थान के युवाओं का एक बड़ा वर्ग अब केवल सरकारी वैकेंसियों के भरोसे बैठने के बजाय डिजिटल स्किल, कोडिंग, फ्रीलांसिंग और लोकल बिजनेस की तरफ मुड़ रहा है।
छात्रों का मानना है कि 3 साल तक अनिश्चितता के माहौल में जीने से बेहतर है कि किसी प्राइवेट जॉब या स्टार्टअप में करियर की शुरुआत कर ली जाए।
पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में हुए पेपर लीक के मामलों ने भी छात्रों के आत्मविश्वास को बुरी तरह झकझोड़ा है।
अधूरी तैयारी और सख्त चेकिंग: अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट एवं परीक्षा के जिला समन्वयक अधिकारी नरेंद्र कुमार वर्मा के अनुसार, इस बार 126 सतर्कता दल और 264 उपसमन्वयक तैनात किए गए थे।
कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और फर्जी कैंडिडेट पकड़ने के लिए चलाए गए 'ऑपरेशन एन्टी वायरस' जैसे अभियानों के डर से उन लोगों ने परीक्षा से पूरी तरह दूरी बना ली, जिनकी तैयारी पुख्ता नहीं थी या जो किसी शॉर्टकट के भरोसे थे।
सेंटर दूर होना भी एक फैक्टर: हालांकि जयपुर जिला कलक्ट्रेट के नियंत्रण कक्ष से कड़ी मॉनिटरिंग की जा रही थी, लेकिन कई महिला अभ्यर्थियों और दूर-दराज के गांवों से आने वाले छात्रों के लिए ट्रांसपोर्ट और रहने की उचित व्यवस्था न हो पाना भी एक तात्कालिक कारण बना।
Updated on:
19 Jul 2026 09:34 am
Published on:
19 Jul 2026 09:34 am
