
Rajasthan Earned Salary Advance Scheme - AI PIC
राजस्थान के सरकारी कर्मचारियों को किसी भी अचानक या आपातकालीन वित्तीय संकट से उबारने के लिए शुरू की गई 'अर्जित सैलरी/पेंशन एडवांस योजना' को लेकर एक दिलचस्प और चौंकाने वाला डेटा सामने आया है। इस योजना के तहत अपनी तय तारीख से पहले वेतन या ऋण के रूप में एडवांस पैसा निकालने वाले कर्मचारियों की दौड़ में माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षा विभाग के शिक्षक सबसे पहले पायदान पर चल रहे हैं, जबकि दिन-रात कानून व्यवस्था संभालने वाले पुलिस महकमे के पुलिसकर्मी इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं।
राज्य में अब तक कुल 82 हज़ार 135 सरकारी कार्मिकों ने इस विशेष स्कीम का लाभ उठाते हुए एडवांस लोन लिया है, जिसमें से अकेले 55 हज़ार 975 कर्मचारी सिर्फ शिक्षा और पुलिस विभाग के हैं। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि राज्य में एडवांस सैलरी लेने वाला हर दूसरा सरकारी कर्मचारी या तो एक शिक्षक है या फिर पुलिसकर्मी।
इस मामले में तीसरे नंबर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिक हैं, जहां के 3 हज़ार 864 कर्मचारियों ने अपने वेतन से एडवांस राशि उठाई है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान के विभिन्न विभागों के सरकारी कार्मिकों ने अब तक कुल 203539 बार में रिकॉर्ड 4377 करोड़ रुपए का एडवांस लोन लिया है।
राजस्थान सरकार के वित्त विभाग ने 31 मई 2023 को एक सर्कुलर जारी कर इस योजना को मंजूरी दी थी, जिसे 1 जून से पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू किया गया था।
एडवान्स सैलरी की सीमा: इस योजना के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी कुल मासिक सैलरी का अधिकतम 50% हिस्सा ही एडवांस के रूप में क्लेम कर सकता है।
अलग-अलग टाइम ऑप्शंस: कर्मचारियों की सुविधा के लिए इसमें 1 माह, 3 माह और 24 माह के वेतन की 50% रकम को एडवांस के रूप में लेने के विकल्प दिए गए हैं।
आरएफएसडीएल है नोडल एजेंसी: इस पूरी व्यवस्था का डिजिटल और फाइनेंशियल संचालन राजस्थान फाइनेंशियल सर्विसेज डिलीवरी लिमिटेड (RFSDL) नामक नोडल एजेंसी द्वारा किया जा रहा है।
इस सरकारी रिपोर्ट का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि सिर्फ कम वेतन पाने वाले कर्मचारी ही नहीं, बल्कि राज्य के बड़े और सीनियर अधिकारी (Officers) भी एडवांस सैलरी स्कीम का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
1 लाख से ज्यादा वेतन वाले अफसर: डेटा के अनुसार, लोन लेने वालों में 1165 अधिकारी ऐसे शामिल हैं, जिनका मासिक वेतन 1 लाख रुपए से अधिक है।
1.5 लाख से ज्यादा वाले कार्मिक: इन बड़े अफसरों में से भी 52 अधिकारी ऐसे हैं, जो हर महीने 1.5 लाख रुपए (डेढ़ लाख रुपए) या उससे ज्यादा की मोटी सैलरी लेते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे भी एडवांस वेतन का सहारा ले रहे हैं।
राज्य के अलग-अलग सरकारी महकमों में एडवांस लोन लेने वाले कर्मचारियों की संख्या इस प्रकार है, जो यह दर्शाती है कि किन विभागों में इस योजना की सबसे ज्यादा डिमांड है:
माध्यमिक शिक्षा विभाग: 29547 कर्मचारी
पुलिस विभाग: 19616 कर्मचारी
प्रारंभिक शिक्षा विभाग: 6812 कर्मचारी
कृषि विभाग: 5335 कर्मचारी
चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग: 3864 कर्मचारी
राजस्व मंडल (Revenue): 2324 कर्मचारी
जलदाय विभाग (PHED): 2030 कर्मचारी
हाईकोर्ट: 1653 कर्मचारी
पशुपालन विभाग: 1612 कर्मचारी
वन विभाग (Forest): 1218 कर्मचारी
अन्य विभाग: 11924 कर्मचारी
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जिन कर्मचारियों का सिबिल स्कोर (CIBIL Score) बहुत कम या खराब होता है और जिन्हें बैंक आसानी से लोन नहीं देते, उन्हें भी इसके तहत तुरंत पैसा मिल जाता है।
आरएफएसडीएल (RFSDL) के कार्यकारी निदेशक मनीष माथुर ने बताया कि योजना में कर्मचारियों को 4 से 5 बेहतरीन विकल्प दिए जाते हैं, जिससे वे अपनी जरूरत के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ विकल्प चुन सकते हैं।
इस कल्याणकारी योजना के सामने एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती भी आ खड़ी हुई है। वर्तमान में राज्य सरकार के करीब 20 करोड़ रुपए एडवांस रिकवरी के रूप में अटके हुए हैं।
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस राशि के बकाया चलने का मुख्य कारण संबंधित ऋणी कर्मचारियों की अचानक हुई असमय मृत्यु, उनका निलंबन, एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण या अन्य बड़े प्रशासनिक फेरबदल हैं। इन कारणों की वजह से कर्मचारियों के वेतन से लोन की मासिक किस्त (EMI) की समय पर वसूली प्रभावित हुई है, जिसे दुरुस्त करने के लिए अब वित्त विभाग नए सिरे से प्रयास कर रहा है।
Updated on:
19 Jul 2026 01:18 pm
Published on:
19 Jul 2026 01:10 pm
