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‘पहले बयान दो’ कहती रही पुलिस, जयपुर में फ्रैक्चर हाथ लेकर 40 घंटे तक दर्द में भटकता रहा युवक

Police Negligence Case: जयपुर में हमले में घायल युवक ने आरोप लगाया कि फ्रैक्चर हाथ होने के बावजूद पुलिस ने इलाज से पहले बयान और कागजी कार्रवाई कराई, जिससे उसे 40 घंटे तक दर्द झेलना पड़ा।
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Jaipur Police Negligence

फ्रैक्चर हाथ के साथ भटकता रहा युवक (Photo-Patrika)

Jaipur Police Negligence: जयपुर में पुलिस की संवेदनहीनता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बदमाशों के लोहे की रॉड से हुए हमले में एक युवक का हाथ फ्रैक्चर हो गया, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उसे तुरंत इलाज दिलाने के बजाय पहले बयान और अन्य कागजी कार्रवाई में उलझाए रखा। पीड़ित का कहना है कि पुलिस बस कल आना कहकर टालती रही। और इसके बाद एफआईआर, बयान और मौका-नक्शा जैसी कागजी औपचारिकताओं का ऐसा खेल चला कि पीड़ित 40 घंटे तक फ्रैक्चर हाथ के साथ तड़पने को मजबूर रहा।

रास्ते में घेरकर किया जानलेवा हमला

जयपुर के रामनगरिया थाना क्षेत्र की बैंक कॉलोनी विस्तार (दांतली) निवासी और बिजली विभाग के कर्मचारी अंकित गौड़ ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 8:15 बजे जब वह घर लौट रहे थे, तभी घर से सिर्फ 500 मीटर पहले बाइक सवार दो युवकों ने उन्हें टक्कर मार दी। बाइक की चाबी निकालकर आरोपियों ने स्टील की रॉड से अंकित पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हेलमेट के कारण सिर तो बच गया, लेकिन हाथ पर गंभीर वार होने से हड्डी टूट गई।

हमलावर लगातार कहते रहे, 'तूने इसे क्यों पीटा?' जबकि वह खुद को निर्दोष बताते रहे। बताया जा रहा है कि एक आरोपी ने हेलमेट पहन रखा था, जबकि दूसरे ने कपड़े से चेहरा ढक रखा था। इसी दौरान तीसरा व्यक्ति भी पहुंच गया। पास की दुकान में छिपकर अंकित ने बदमाशों का वीडियो बनाया, जिसके बाद दुकानदार और भीड़ को देख आरोपी भाग छूटे।

घंटों थाने के बाहर बैठाया

अंकित का आरोप है कि वह गंभीर हालत में उसी रात रामनगरिया थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने मेडिकल कराने के बजाय उन्हें शनिवार सुबह आने की बात कहकर लौटा दिया। शनिवार सुबह जब वह दोबारा थाने पहुंचे, तो उन्हें घंटों बाहर बैठाए रखा गया। जब पीड़ित ने दर्द का हवाला देकर मेडिकल की मांग की, तो पुलिसकर्मियों ने साफ कह दिया कि पहले बयान दर्ज होंगे और मौका-नक्शा बनेगा।

बाद में पुलिस उन्हें जेएनएयू अस्पताल ले गई, जहां अगले दिन एक्स-रे होने की बात कहकर टाल दिया गया। अंकित ने जब निजी अस्पताल में इलाज की कोशिश की, तो वहां भी पुलिस केस का हवाला देकर प्रक्रिया पूरी होने तक एक्स-रे करने से मना कर दिया गया ताकि साक्ष्य प्रभावित न हों।

पुलिस का क्या है कहना?

वहीं पुलिस का कहना है कि मारपीट के मामले में पीड़ित की शिकायत पर तत्काल प्रकरण दर्ज कर लिया गया था। पुलिस ने उसे अस्पताल ले जाकर मेडिकल भी करवाया है। उपचार वह अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी अस्पताल में करा सकता है।

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