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Ramgarh Dam: क्यों नहीं भरता बांध? 14 साल पहले कोर्ट में सरकार ने मानी थी बड़ी चूक,आज तक नहीं बदले हालात

Ramgarh Dam Catchment Area: रामगढ़ बांध के कैचमेंट क्षेत्र में 235.83 हेक्टेयर अतिक्रमण और 225 अवैध भूमि आवंटन को सरकार ने कोर्ट में स्वीकार किया था। 14 साल बाद भी कब्जे नहीं हटने से बांध तक पानी पहुंचने में परेशानी बनी हुई है।
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Ramgarh Dam

रामगढ़ बांध (Photo-Patrika)

Ramgarh Dam Encroachment: रामगढ़ बांध की हालत आज भी नहीं सुधरी है। हैरानी की बात यह है कि 14 साल पहले साल 2012 में राजस्थान सरकार ने खुद कोर्ट में अपनी चूक मानी थी और बताया था कि बांध के कैचमेंट इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे हो गए हैं। कई जगह गलत तरीके से जमीन का आवंटन हुआ और पानी के प्राकृतिक रास्तों पर भी रुकावटें खड़ी हो गईं हैं। सरकार ने अदालत से इन कब्जों को हटाने और अवैध आवंटन रद्द करने का वादा भी किया था, लेकिन आज तक हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। नतीजा यह है कि अच्छी बारिश होने के बावजूद बांध तक पूरा पानी नहीं पहुंच पा रहा।

सरकार ने कोर्ट में खुद रखे थे ये आंकड़े

साल 2012 में राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि रामगढ़ बांध के कैचमेंट क्षेत्र में 225 अवैध भूमि आवंटन की पहचान की गई है। इसके अलावा 141 संदिग्ध नामांतरण भी सामने आए थे। रिपोर्ट में यह भी माना गया कि 235.83 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है। सरकार ने यह भी स्वीकार किया था कि इन अवैध निर्माणों और कब्जों की वजह से बांध तक पानी पहुंचाने वाले प्राकृतिक जल मार्ग प्रभावित हो रहे हैं।

14 साल में और बढ़ा निर्माण

कोर्ट में दिए गए भरोसे के बाद उम्मीद थी कि कैचमेंट इलाके को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उल्टा 2021 से 2026 के बीच कैचमेंट इलाके में फार्म हाउस, रिसॉर्ट और पक्के मकानों की संख्या बढ़ती गई। कई बरसाती नालों के रास्ते पहले से छोटे हो गए, जबकि कई जगह पानी का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। इसका असर हर बारिश में साफ दिखता है। बारिश का काफी पानी रामगढ़ बांध तक पहुंचने की बजाय बीच रास्ते में ही रुक जाता है या फिर दूसरी तरफ बह जाता है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था ?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि रामगढ़ बांध के सूखने की वजह केवल कम बारिश नहीं है। कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण, अवैध भूमि आवंटन, अनियोजित निर्माण, अवैध खनन और जल प्रवाह में कृत्रिम बाधाएं इसके प्रमुख कारण हैं। अगर मौजूदा स्थिति की बात करें तो कार्रवाई के नाम पर बीते 14 सालों में सिर्फ खानापूर्ति ही हुई है। 2013 से 2020 के बीच कुछ जगह प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्रवाई जरूर की, लेकिन वह सिर्फ दिखावे तक ही सीमित रही। पूरे कैचमेंट इलाके से कब्जे नहीं हटाए गए। बांध तक पानी लाने वाली नदियों और बरसाती रास्तों पर आज भी कई जगह अतिक्रमण है। कई जगह एनीकट भी बना दिए गए, लेकिन उन्हें हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हाईकोर्ट के आदेशों पर उसी समय सख्ती से काम होता, तो आज रामगढ़ बांध फिर से जयपुर के लिए पानी का बड़ा सहारा बन सकता था। उनका मानना है कि अभी भी देर नहीं हुई है। सरकार अगर 14 साल पुराने आदेशों को सिर्फ फाइलों में रखने के बजाय जमीन पर लागू करे, तो हालात में सुधार आ सकता है।