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असमंजस में कांग्रेस कार्यकर्ताः जुटना था विधानसभा चुनाव की तैयारियों में, केंद्र के खिलाफ विरोध- प्रदर्शनों में उलझे

-कांग्रेस के सियासी गलियारों में भी चर्चाएं, विरोध प्रदर्शनों की बजाए विधानसभा चुनाव तैयारियों में करना चाहिए फोकस, पिछले डेढ़ माह से लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रही है कांग्रेस, 30 अप्रैल तक की कांग्रेस को करना है केंद्र सरकार के खिलाफ अलग-अलग प्रदर्शन

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव में महज भले ही अब 8 महीने का समय बचा हो लेकिन पार्टी के तमाम नेता और कार्यकर्ता विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने की बजाए केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन में व्यस्त हैं, केंद्र सरकार के खिलाफ होने वाले आंदोलन के चलते पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर कोई फोकस नहीं कर पा रही है। हाल ही में संपन्न हुए संभाग स्तरीय सम्मेलनों के दौरान भी चुनावी तैयारियों में बोलने की बजाएकेंद्र सरकार पर हमले करने पर ही केंद्रित रहे।

इसे लेकर अब पार्टी कार्यकर्ता भी असमंजस की स्थिति में है कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटा जाए या फिर राहुल गांधी मामले को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ होने वाले आंदोलनों और धरने- प्रदर्शनों में ही व्यस्त रहें। इसे लेकर इन दिनों कांग्रेस गलियारों में भी चर्चाएं खूब हैं।

पिछले डेढ़ महीने से लगातार प्रदर्शन
दिलचस्प बात तो यह है कि केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी प्रदेश में लगातार पिछले डेढ़ महीने से धरने- प्रदर्शनों का आयोजन कर रही है, इससे पहले अडानी समूह के खिलाफ भी कांग्रेस पार्टी ने जयपुर सहित प्रदेश भर में धरने-प्रदर्शन किए थे और अब राहुल गांधी मामले में भी तमाम जिलों में सत्याग्रह आंदोलन किए गए। वहीं दिलचस्प बात तो यह है कि प्रदेश में 30 अप्रेल तक पार्टी को अलग-अलग धरने- प्रदर्शन मोदी सरकार के खिलाफ करने हैं।

इधर कांग्रेस हलकों में चर्चा इस बात की है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी मामले को लेकर पार्टी भले ही धरने प्रदर्शन करें लेकिन राजस्थान में पूरा फोकस विधानसभा चुनाव के रण की तैयारियों पर भी होना चाहिए।


कांग्रेस हलकों में चर्चा इस बात की भी है कि राजस्थान में प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने अपना पूरा फोकस विधानसभा चुनाव के रण पर किया हुआ है और लगातार बूथ लेवल से लेकर ग्रास रूट पर भी विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं, जबकि कांग्रेस में अभी तक चुनावी तैयारियों को लेकर कोई रोड मैप तैयार नहीं हो पाया है।

विपक्ष से ज्यादा सत्ता पक्ष के धरने- प्रदर्शन
दिलचस्प बात तो यह भी है कि राजस्थान में भले ही कांग्रेस पार्टी सत्ता में हो लेकिन पिछले साढ़े 4 साल के दौरान कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान में प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी से करीब 3 गुना ज्यादा धरने प्रदर्शन किए है, जिनमें सीएए- एनआरसी, कृषि कानून, पेगासस, राफेल डील, केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग, अडानी समूह अब राहुल गांधी मामले को लेकर विरोध- प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

संगठन भी लचर
हैरत की बात तो यह भी है कि विधानसभा चुनाव में 8 महीने का समय बचा है लेकिन उसके बावजूद भी राजस्थान कांग्रेस का संगठन पूरी तरह से मजबूत नहीं हो पाया है। संगठन में सबसे मजबूत इकाई माने जाने वाले जिला अध्यक्षों की नियुक्ति भी अभी तक नहीं हो पाई है।

ढाई साल से भी ज्यादा समय से जिलाध्यक्ष नहीं बन पाए हैं। 39 जिलों में से केवल 13 ही जिलाध्यक्ष बन पाए थे उनमें से भी चार जिलाध्यक्षों ने अपने पद से इस्तीफा दिया हुआ है। वहीं पार्टी के तमाम प्रकोष्ठ और विभाग भी ढाई साल से भंग हैं। ऐसे में कहा यही जा रहा है कि पार्टी संगठन को मजबूत किए बिना विधानसभा के रण में किस प्रकार से उतरेगी।

इनका कहना है
चुनावी तैयारियों में जुटने के साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ता पूरे प्रदेश भर में केंद्र की मोदी सरकार की नाकामियों को घर-घर पहुंचा रहे हैं, केंद्र सरकार ने इआरसीपी को लेकर जो धोखा राजस्थान के साथ किया है, उससे प्रदेश की जनता में भी नाराजगी है। जिस प्रकार से प्रकार से विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है, उसे भी जनता देख रही है। इन्ही मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं।

स्वर्णिम चतुर्वेदी, प्रवक्ता
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी

वीडियो देखें- कांग्रेस का सत्याग्रह स्थगित | Rajasthan Congress