
सुनील सिंह सिसोदिया/ जयपुर। राजस्थान में भीषण गर्मी से तेजी से बांधों का जल स्तर नीचे जा रहा है। पिछले 15 दिन में ही बांधों का 166.46 एमक्यूएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी कम हो गया है। राज्य के 688 बांधों में से 460 सूख चुके हैं। 225 बांधों में मामूली पानी बचा है। 3 बांध ही पूर्ण भरे हुए हैं। बांधों में पानी भराव क्षमता का 35.41 एमक्यूएम से भी कम रह गया है। पानी बचा है वह भी मुख्य रूप से 22 बड़े बांधों में है। इधर, जयपुर, अजमेर और टोंक जिले का मुख्य जल स्रोत बीसलपुर में भी तेजी से पानी कम हो रहा है। बीसलपुर बांध में पानी की अभी जो भराव क्षमता है, वो 2027 तक ही पर्याप्त है।
इसके बाद बीसलपुर का पानी भी जयपुर की प्यास नहीं बुझा पाएगा। इन हालात में राजधानी जयपुर के लिए अभी से राज्य सरकार को वैकल्पिक उपायों पर तेजी से काम करना होगा। ईआरसीपी-पीकेसी को लेकर एमओयू हुआ है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की सुस्ती के चलते डीपीआई को लेकर काम आगे नहीं बढ़ पा रहा। योजना के अमल में आने से चंबल का पानी बीसलपुर और ईसरदा बांध में भी पहुंचाया जाना है।
चंबल, कूल, पार्वती, कालीसिंध, मेज और बनास नदी से 3500 एमसीएम जल उपयोग के लिए ही ईआरसीपी-पीकेसी योजना तैयार की गई है। इसके लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश और भारत सरकार के बीच 28 जून 2024 को त्रिपक्षीय समझौता होने के बाद डीपीआर तैयार करने को लेकर राजस्थान सरकार ने जरूरी दस्तावेज राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण (एनडब्ल्यूडीए) को भेज दिए हैं। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की ओर से दस्तावेज नहीं भेजे जाने से डीपीआर का काम नहीं हो पा रहा।
20 वर्षों में बीसलपुर बांध मात्र 6 बार पूर्ण भरा है। बांध में पेयजल के लिए आरक्षित 16.2 टीएमसी पानी बरसात के दिनों में नहीं आ रहा। पानी कम आने पर 3 जिलों के लिए संकट खड़ा हो जाता है। यही वजह है कि 16.2 टीएमसी की जगह पेयजल के लिए पीएचईडी 12 टीएमसी ही पानी उपयोग में ले पा रही है। किसानों के पानी में भी कटौती की जा रही है। बांध का 16.2 टीएमसी पानी भी 2027 तक ही इन जिलों की प्यास बुझा सकता है। फिर पानी के लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
सिंचाई विभाग के जानकारों के मुताबिक चंबल नदी के पानी का प्रबंधन नहीं होने से 16 बीसलपुर बांध भराव क्षमता के बराबर पानी व्यर्थ बह जाता है। ईआरसीपी-पीकेसी 3500 एमसीएम पानी को लेकर बनाई गई है। लेकिन एक अनुमान के मुताबिक चंबल नदी से हर साल बरसात के दिनों में 19000 एमसीएम पानी व्यर्थ बह रहा है। यह पानी योजना के अमल में आने से बीसलपुर, ईसरदा व अन्य बांधों में भरा जा सकता है।
हर 10 साल में करीब 7 बार मानसून में चंबल नदी में बाढ़ आती है और यह अमूल्य पानी यमुना नदी में चला जाता है। केन्द्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार करौली जिले से 16000 एमसीएम और धौलपुर जिले से 19000 एमसीएम पानी यमुना नदी में व्यर्थ बह जाता है। चंबल में बाढ़ आने पर एक दिन में ही 5 से 6 हजार एमसीएम पानी बह जाता है। जबकि चंबल नदी के किनारे राजस्थान का एक बड़ा हिस्सा पानी संकट से जूझता रहता है।
राज्य में 460 बांध सूखे…
प्रदेश में कुल बांध - 688
बांध अब तक सूखे - 460
आंशिक भरे हुए - 225
पूर्ण भरे हुए - 3
16 मई तक स्थिति (एमक्यूएम)…
यों समझें बांधों में पानी की स्थिति (एमक्यूएम)…
जल संसाधन संभाग, बांध और पानी की स्थिति (एमक्यूएम)…
संभाग - बांध - 30 सिंतबर 2023 की स्थिति - 16 मई 2024 की स्थिति
जयपुर - 252 - 1443.38 - 502.82
जोधपुर - 116 - 682.01 - 106.80
कोटा - 80 - 3885.45 - 2399.79
बांसवाड़ा - 59 - 2536.99 - 1040.80
उदयपुर - 181 - 1102.20 - 434.73
Published on:
24 May 2024 03:43 pm
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