25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कहानी 1952 के विधानसभा चुनाव की: सीएम रहते दो जगह से हारे, उपचुनाव जीतकर बने मुख्यमंत्री

https://www.patrika.com/rajasthan-news/

3 min read
Google source verification
Rajasthan Assembly Election 1952

हनुमान गालवा/जयपुर। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पहले विधानसभा चुनाव में राज परिवारों को उम्मीद के विपरीत मिली आश्चर्यजनक सफलता से राजशाही ने लोकशाही में अपना सम्मानजनक स्थान तलाश लिया। लोकनायक जयनारायण व्यास पराजित नहीं होते तो कांग्रेस मेें सुखाडिय़ा युग का मार्ग प्रशस्त नहीं होता या महाराजा हनवंत सिंह चुनाव के बाद जीवित रहते तो राजस्थान की राजनीति का इतिहास दूसरा ही होता।

आजादी के बाद राजस्थान में पहला विधानसभा चुनाव सामंती खौफ के बीच संपन्न हुआ। राजा-महाराजा और सामंतों ने न केवल अपनी राजनीतिक पार्टी बना ली, बल्कि तलवारें म्यान में रखकर बड़ी संख्या में चुनावी जंग में कूद पड़े। कांग्रेस ने बड़ी मुश्किल से बहुमत का आंकड़ा पार किया, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए लोकनायक जयनारायण व्यास के दो जगह से चुनाव हार जाने से मुश्किल बढ़ गई। बाद में उपचुनाव जीतकर 1 नवम्बर 1952 को फिर मुख्यमंत्री बने।


मात खा गए, लोकनायक
लोकनायक जयनारायण व्यास ने मुख्यमंत्री रहते हुए दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा और दोनों ही जगह बुरी तरह हार गए। जोधपुर सिटी बी विधानसभा क्षेत्र से उनके सामने महाराजा हनवंत सिंह चुनाव में उतर गए।

सिंह को 11,786 मत मिले, जबकि व्यास को केवल 3,159 वोट ही मिल पाए। जालोर ए विधानसभा क्षेत्र से व्यास के सामने जागीरदार माधोसिंह को उतारा गया। यहां सिंह को 12,896 मत मिले और व्यास को केवल 3,712 वोट ही मिल पाए। चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार बनी, लेकिन व्यास मुख्यमंत्री नहीं बने।


नहीं बनती कांग्रेस की सरकार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहले विधानसभा चुनाव में संख्याबल के लिहाज से कांग्रेस की कोई मजबूत स्थिति नहीं थी। लिहाजा महाराजा हनवंत सिंह की हादसे में मौत नहीं होती तो न केवल कांग्रेस की सरकार बनने में बाधा आती, बल्कि कांग्रेस की टूट से हनवंत सिंह के भी सरकार बना लेने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था। कांग्रेस 160 में से 82 सीटों मेंं जीत पाई, जबकि सामंती प्रभाव वाली पार्टियां और निर्दलीय विधायकों की संख्या 78 थी।

हनवंत सिंह व जुबैदा की मौत, जश्न से पहले मातम
जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह ने जोधपुर लोकसभा तथा जोधपुर बी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाकर चुनाव मैदान में उतरे हनवंत ने मतगणना के दौरान लोकसभा तथा विधानसभा क्षेत्र से अपनी बढ़त से खुश होकर जुबेदा के साथ प्लेन से उड़ान भरी।

इस दौरान प्लेन क्रैश में दोनों की मौत हो गई। परिणाम सुनने के लिए वे जिंदा नहीं रहे। उनके निधन के बाद देश में लोकसभा का पहला उपचुनाव हुआ, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी जसवंत सिंह मेहता विजयी रहे। बाद में मेहता कांग्रेस में आ गए और उन्होंने दूसरी लोकसभा का चुनाव कांग्रेस से लड़ा और जीते।

हाशिये पर व्यास
कांग्रेस में अंतरकलह के चलते जयनायण व्यास धीरे-धीरे हाशिए पर आ गए। मोहनलाल सुखाडिय़ा को 13 नवंबर, 1954 में राज्य का सीएम बनाया। सुखाडिय़ा का कांग्रेस में 17 साल तक वर्चस्व रहा। व्यास को राज्य सभा में भेजकर प्रदेश राजनीति से अलग कर दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो विस चुनाव में नहीं हारते तो मुख्यधारा की राजनीति में व्यास को हाशिए पर धकेलना आसान नहीं होता।


5 साल में तीन मुख्यमंत्री
टीकाराम पालीवाल ने 3 मार्च, 1952 को राज्य के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। हालांकि 1 नवंबर को किशनगढ़ से उपचुनाव जीतकर व्यास ने सीएम पद पुन: संभाल लिया। गौरतलब है कि कांग्रेस के चांदमल ने व्यास के लिए सीट खाली की थी। व्यास को हटाकर कुछ समय बाद मोहनलाल सुखाडिय़ा मुुख्यमंत्री बन गए।

चुनाव के मुख्य बिंदू

- विधानसभा में कुल सीटें : 160
- कुल मतदाता : 76,76,419
- मतदान किया : 33,36,850
- वैध मत की संख्या : 32,61,442
- अवैध मत : 75,408
- वोट पड़े : 36.69 प्रतिशत
- कितने सीटों निर्विरोध निर्वाचन हुआ : 7 सीटों पर
- उम्मीदवार मैदान में थे : 616
- सबसे बड़ी पार्टी को कितने प्रतिशत वोट मिले : 12,86,953 मत लेकर, 82 सीटों पर विजय प्राप्त की।
- सबसे बड़ी पार्टी जीती : कांग्रेस
- किसकी सरकार बनी : कांग्रेस
- विपक्ष की कुल सीटें : 78
- कितनी महिला प्रत्याशी जीती: प्रथम विधानसभा चुनाव में कोई भी महिला प्रत्याशी जीतकर विधानसभा नहीं पहुंची, लेकिन उपचुनावों में बांसवाड़ा से यशोदा देवी (1953)) तथा कमला बेनीवाल (1954) में चुनाव जीती
- पहले आम चुनाव में चुनाव अधिकारियों को भी फील्ड में जाने के लिए साइकिल और ऊंटगाडिय़ां मिली थी।
- प्रचार में लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल किया।