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विधानसभा चुनाव ने पांच बड़े नेताओं को कर दिया भारी ‘डेमेज’, आया भविष्य खतरे में

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विधानसभा चुनाव ने पांच बड़े नेताओं को कर दिया भारी 'डेमेज', आया भविष्य खतरे में

अरविन्द सिंह शक्तावत / जयपुर. विधानसभा का यह चुनाव कई मायनों में याद रखा जाएगा। इस चुनाव ने जहां कई युवा चेहरों को विधायक बना दिया, वहीं तीन ऐसे दिग्गज नेताओं को ऐसा डेमेज कर दिया कि आने वाले चुनावों में उनका भविष्य ही खतरे में डाल गया है। इनमें से चार तो भाजपा के नेता हैं और एक भाजपा को छोड़कर अपनी पार्टी बनाने वाले नेता हैं। पांचों को ही राजनीति का बड़ा खिलाड़ी माना जाता रहा है, लेकिन इस चुनाव ने उनको राजनीतिक अवसान की तरफ धकेल दिया है।

घनश्याम तिवाड़ी: नई पार्टी बनाई, पर जमानत भी जब्त
राजनीति का लम्बा अनुभव रहा है और कई बार सीट बदल कर चुनाव लड़ते आए हैं। 2013 के चुनाव में 65 हजार से ज्यादा मतों से जीते थे। जीतने के बाद भाजपा से लगातार दूरी बनाए रखी और नई पार्टी बना ली। खुद भी चुनाव लड़े और दूसरों को भी अपनी पार्टी से चुनाव लड़वाया। लेकिन, चुनाव परिणामों ने तिवाड़ी को भारी डेमेज कर दिया। सांगानेर से चुनाव लड़ रहे तिवाड़ी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए।

किरोड़ी लाल मीणा: मोदी की रैली भी नहीं कर पाई कमाल
2013 के चुनाव में अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़े और चार विधायक बनाए। काफी मान मनौव्वल के बाद भाजपा में शामिल हो गए और राज्यसभा पहुंचे। इस विधानसभा चुनाव में पत्नी गोलमा देवी को सपोटरा से टिकट दिलवाया और भतीजे राजेन्द्र मीणा को महुवा से टिकट दिलवाया। दौसा में प्रधानमंत्री मोदी की रैली भी करवाई, लेकिन परिणाम आया तो उनके लिए अच्छे संकेत लेकर नहीं आया। पत्नी गोलमा देवी 14104 वोटों से चुनाव हार गई। भतीजा राजेन्द्र मीणा 9985 मतों से चुनाव हार गया।

देवी सिंह भाटी: बड़े नामों में शुमार, बहू की हार से झटका
पश्चिमी राजस्थान का जाना माना चेहरा माना जाता है और राजपूतों क्षत्रपों में बड़े नामों में से एक हैं। भाटी की जमीनी नेता के रूप में बड़ी पहचान रही है और वे कोलायत से लगातार सात बार विधायक रहे। 2013 के चुनाव में उनको एक युवा चेहरे ने ही पटकनी दे दी। यह वो दौर था, जब देश में मोदी लहर थी। मोदी लहर में भाटी 1134 मतों से चुनाव हार गए। इस चुनाव में भाटी ने अपनी बहू पूनम कंवर को टिकट दिलाया, लेकिन पूनम कंवर 11016 वोटों से चुनाव हार गईं।

काका सुंदर लाल
पुत्र मोह में इनको भी बड़ा झटका लगा। काका ने पुत्र कैलाश चंद को पिलानी से टिकट दिलाया, लेकिन वे 13539 वोटों से चुनाव हार गए।

नन्द लाल मीणा
विधायक व मंत्री रह चुके नन्द लाल मीणा ने प्रतापगढ़ से अपने पुत्र को टिकट दिलवाया, लेकिन रामलाल मीणा 16680 वोटों से चुनाव हार गए।

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