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चुनावी बॉन्ड पर ‘सुप्रीम’ फैसला आते ही अशोक गहलोत ‘हमलावर’, बोले- यह देश के सबसे बड़े घोटाले में से एक

राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने चुनावी बॉन्ड योजना (electoral bond scheme) की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक और स्वागत योग्य बताया है। उन्होंने ट्वीट के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर भ्रष्टाचार को बढ़ाने के गंभीर आरोप लगाए। कहा कि इसने राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को खत्म किया और सत्ताधारी पार्टी भाजपा को सीधे लाभ पहुंचाया।

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Ashok Gehlot

जयपुर। राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने चुनावी बॉन्ड योजना (electoral bond scheme) की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक और स्वागत योग्य बताया है। उन्होंने अपने पूर्व में दिए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि वे पहले ही चुनावी बॉन्ड की वैधानिकता पर सवाल खड़े कर चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्वीट प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने लिखा, 'चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक ठहराने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक एवं स्वागत योग्य है। चुनावी बॉन्ड ने भ्रष्टाचार को बढ़ाने का काम किया। इसने राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को खत्म किया और सत्ताधारी पार्टी भाजपा को सीधे लाभ पहुंचाया।'

गहलोत ने आगे लिखा, 'मैंने बार-बार कहा कि चुनावी बॉन्ड आजाद भारत के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि चुनावी बॉन्ड एनडीए सरकार का एक बड़ा घोटाला है। यह फैसला देर से आया पर देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए बेहद ही जरूरी फैसला है।'


चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुना दिया है। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन और असंवैधानिक माना है। कोर्ट का कहना है कि चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए इसे रद्द करना होगा।। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को किसी अन्य विकल्प पर विचार करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने योजना की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक पार्टियों को हो रही फंडिंग की जानकारी मिलना बेहद जरूरी है। जो सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।

मामले की सुनवाई पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने की है। सुनवाई प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में की गई। जिसमें न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। इस दौरान पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से दलीलें दी गईं। कोर्ट ने सभी पक्षों को गंभीरता से सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसे आज (15 फरवरी) को सुनाया गया।

इस योजना को सरकार द्वारा 2 जनवरी, 2018 को अधिसूचित किया गया था। इसके अनुसार, चुनावी बॉन्ड भारत के किसी भी नागरिक या देश में स्थापित किसी भी इकाई द्वारा खरीदा जा सकता है। कोई भी व्यक्ति अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से चुनावी बॉन्ड खरीद सकता है। ऐसे राजनीतिक दल चुनावी बॉन्ड के लिए प्राप्त करने के दायरे में आते हैं जिन्हें पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कम से कम एक फीसदी वोट मिले हों।

चुनावी बॉन्ड पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी को चुनावी बॉन्ड के जरिए अन्य पार्टियों से काफी अधिक चंदा प्राप्त हुआ। भाजपा को 2022-23 में चुनावी बॉन्ड के माध्यम से लगभग 1300 करोड़ रुपये मिले। जो कि कांग्रेस पार्टी को प्राप्त धनराशि से सात गुना अधिक है। निर्वाचन आयोग को सौंपी गई पार्टी की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में भाजपा को कुल 2120 करोड़ रुपये मिले जिसमें से 61 प्रतिशत चुनावी बॉन्ड से प्राप्त हुए।

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