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राजस्थान: पुलिस कार्यशैली से नाराज़ Ex DGP हरीश मीना ने छोड़ा अन्न-जल, भीषण गर्मी में पिछले 6 दिन से हैं धरने पर

राजस्थान: पुलिस कार्यशैली से नाराज़ Ex DGP हरीश मीना ने छोड़ा अन्न-जल, भीषण गर्मी में पिछले 6 दिन से हैं धरने पर

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Rajasthan Ex DGP Harish Meena protest against Police

जयपुर।

राजस्थान की गहलोत सरकार में कांग्रेस के ही विधायक पिछले दो दिन से भूखे-प्यासे अनशन पर बैठे हुए। इसे पहले वो लगभग पांच दिन तक धरने पर बैठे रहे। ताज्जुब की बात ये है कि कांग्रेस विधायक के धरने और अनशन पर बैठने के बाद भी सरकार इस गतिरोध को ख़त्म करने में नाकाब साबित हो रही है। इस बीच न्याय की मांग को लेकर अनशन पर बैठे कांग्रेस विधायक के समर्थन में अब एक भाजपा विधायक भी अनशन पर बैठ गए हैं। मामला ट्रेक्टर संदिग्ध अवस्था में मौत से जुड़ा है, जिसे लेकर पुलिस पर ह्त्या किये जाने का आरोप लग रहा है।

भरी गर्मी में अनशन का तीसरा दिन
राजस्थान की भरी गर्मी के बीच टोंक में एक युवक की संदिग्ध अवस्था में मौत का मामला गर्माया हुआ है। कांग्रेस विधायक हरीश चंद्र मीना अपनी ही सरकार में पुलिस की कार्यशैली से नाराज़ होकर पहले धरने और अब अनशन पर बैठ गए हैं। टोंक में गर्मी ने तीखे तेवर दिखाए हुए हैं और पारा 45 डिग्री के पार चला गया है। लेकिन फिर भी विधायक का धरना-अनशन जारी है। गौरतलब है कि मीना राजस्थान में पुलिस महानिदेशक भी रहे हैं। अब वे पुलिस कार्यशैली से ही नाराज़ हैं।

इधर, मीना के साथ भारतीय जनता पार्टी विधायक गोपीचंद मीणा भी ट्रैक्टर चालक की कथित हत्या मामले में अनशन पर हैं। अनशन सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। मीना ने इस मामले में टोंक जिले के नगरफोर्ट प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के बाहर पांच सूत्रीय मांगों को लेकर गत 29 मई को धरना शुरु कर दिया था।
धरने के तीन दिन बाद भी उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर एक जून से दोनों विधायकों ने अनशन शुरु कर दिया।

अनशन के दौरान बिगड़ी हालत, डॉक्टर पहुंचे
अनशन के दौरान विधायक मीना को कमजोरी महसूस होने पर सोमवार को धरनास्थल पर ही उनकी चिकित्सा जांच की गई और उन्हें ड्रीप चढाई गई। हरीश चंद्र मीना ने मीडिया से कहा कि एक गरीब की हत्या हुई है। सरकार मानने को तैयार नहीं है और पुलिस इसे दुर्घटना बता रही है। लेकिन वह क्षेत्र के विधायक होने के नाते और अपराध के खिलाफ एवं न्याय को लेकर आंदोलन कर रहे है और न्याय मिलने तक उन्हें कोई भी कीमत चुकानी पड़े, वह शांतिपूर्वक आंदोलन जारी रखेंगे।

गहलोत-पायलट से हुई बात, लेकिन समाधान नहीं
एक सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर उनकी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से भी बात हुई लेकिन अभी तक नतीजा कुछ नहीं निकला।

पुलिस कार्यशैली से नाराज़ पुलिस महानिदेशक रहे मीना
पुलिस पर सवाल उठाने के प्रश्न पर पुलिस महानिदेशक रह चुके हरीश चनरा मीना ने कहा कि उनके पुलिस महानिदेशक रहते भरतपुर जिले में गोपालगढ़ फायरिंग मामला हुआ, उसमें पुलिस अधीक्षक को निलम्बित कर दिया गया था लेकिन इस मामले में तो अब तक एक थानेदार को ही निलम्बित नहीं किया गया।

अन्य दलों का मिल रहा समर्थन
अब तक किसी मांग पर सरकार के साथ कोई सहमति बनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार का कोई प्रतिनिधि जयपुर से आये और सबके सामने बोले। लेकिन अभी तक कुछ नहीं बोला गया है। इस मामले में दोनों विधायकों का भाजपा, बहुजन समाज पार्टी (बसपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता भी समर्थन कर रहे है।

भाजपा के सांसद सुखवीर सिंह जौनपुरिया, पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी तथा अन्य पार्टी नेता एवं पदाधिकारी धरनास्थल पर आ चुके है। माकपा के भादरा विधायक बलवान पूनिया भी सोमवार को अनशन स्थल पर पहुंचे। इसी तरह बसपा विधायक लाखन सिंह मीणा ने भी अनशन कर रहे विधायकों की मांग को वाजिब बताते हुए कहा कि बसपा पीड़ति परिवार को न्याय दिलाने के लिए उनके साथ है।

रमेश मीणा को मिली गतिरोध ख़त्म करने की ज़िम्मेदारी
उधर इस मामले में खाद्यमंत्री रमेश मीणा को अनशन कर रहे विधायकों से बात कर इसे सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस मामले में की जा रही पांच सूत्री मांगों में पुलिस के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने, मृतक के आश्रित को सरकारी नौकरी, पच्चीस लाख रुपए का मुआवजा, मामले की जांच सीआईडी सीबी से कराना आदि शामिल है।

उल्लेखनीय है कि टोंक जिले के उनियारा उपखंड के बोसरिया गांव के पास 28 मई देर रात ट्रैक्टर चालक भजनलाल मीणा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों का आरोप है कि पुलिस के मारपीट करने से भजनलाल की मौत हुई।