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Rajasthan: 1.5 लाख में फर्जी खेल सर्टिफिकेट, खटा-खट सरकारी नौकरी, पूर्व खेल संघ का सचिव गिरफ्तार

राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। मामले में एसओजी ने खेल संघ के पूर्व सचिव बुधाराम टांक को गिरफ्तार किया है, जो पैसे लेकर अभ्यर्थियों को फर्जी राष्ट्रीय ताईक्वांडो सर्टिफिकेट दे रहा था। इस सर्टिफिकेट के जरिए कुछ अभ्यर्थी अध्यापक भी बन गए।
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जयपुर

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Kamal Mishra

Jun 25, 2026

Budharam Tank

Jaipur: SOG की गिरफ्त में आरोपी बुधाराम टांक (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। राजस्थान की शिक्षक भर्ती में खेल कोटे के जरिए सरकारी नौकरी पाने का एक बड़ा खेल सामने आया है। राष्ट्रीय स्तर के ताईक्वांडो खिलाड़ी बनने के फर्जी दस्तावेज तैयार कर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने के आरोप में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने जोधपुर जिले के पीपाड़ सिटी निवासी और टोगोबार खेल संघ के पूर्व सचिव बुधाराम टांक को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया है कि खेल कोटे से नौकरी का सपना दिखाकर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले गए और बदले में उन्हें बैकडेटेड राष्ट्रीय स्तर के ताईक्वांडो प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर अभ्यर्थियों ने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 में आवेदन किया और चयन प्रक्रिया में शामिल हो गए।

तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2022 में फर्जीवाड़ा आया सामने

एसओजी के अनुसार, कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में खेल कोटे के तहत दो प्रतिशत पद आरक्षित थे। जांच के दौरान पता चला कि ताईक्वांडो के राष्ट्रीय स्तर के संदिग्ध प्रमाण-पत्रों के आधार पर दो गुना चयन सूची में शामिल 38 अभ्यर्थियों ने चयन समिति के समक्ष ये दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।

1.5 लाख में दिए थे राष्ट्रीय खेल सर्टिफिकेट

पूछताछ में गिरफ्तार अभ्यर्थी कविता ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उसने खेल कोटे से नौकरी हासिल करने के लिए करीब तीन वर्ष पहले बुधाराम टांक को डेढ़ लाख रुपये दिए थे। इसके बदले उसे वर्ष 2016-17 का बैकडेटेड राष्ट्रीय ताईक्वांडो प्रतियोगिता में भागीदारी का प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया था।

हरियाणा से कनेक्शन

जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2020 से 2023 के बीच टोगोबार खेल संघ के सचिव रहे बुधाराम टांक के संपर्क हरियाणा के सतीश डूल और विवेक नामक व्यक्तियों से थे। आरोप है कि दोनों फर्जी राष्ट्रीय स्तर के ताईक्वांडो प्रमाण-पत्र तैयार करवाने का काम करते थे। एक प्रमाण-पत्र की कीमत करीब दो लाख रुपये तय थी, जबकि अभ्यर्थियों से लगभग डेढ़ लाख रुपये वसूले जाते थे।

बस से जोधपुर आते थे फर्जी सर्टिफिकेट

एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि तैयार किए गए फर्जी प्रमाण-पत्र बस के माध्यम से जोधपुर भेजे जाते थे, जहां से बुधाराम टांक उन्हें अभ्यर्थियों तक पहुंचाता था। इसके बाद इन दस्तावेजों को अन्य शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के साथ भर्ती प्रक्रिया में जमा कर दिया जाता था।

यह वीडियो भी देखें :

मिलती-जुलती ई-मेल आईडी से कराया सत्यापन

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के लिए ताईक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया के नाम से मिलती-जुलती फर्जी ई-मेल आईडी बनाई गई थी। इसी ई-मेल के जरिए प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर को कूटरचित सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई, जिससे पूरे फर्जीवाड़े को वैध दिखाने की कोशिश की गई।

एसओजी पहले ही कुछ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी

इस मामले में एसओजी पहले ही फर्जी सत्यापन रिपोर्ट भेजने वाले बिमलेन्दु कुमार झा, उसके सहयोगी कमल साह सहित कई अभ्यर्थियों और दलालों को गिरफ्तार कर चुकी है। अब जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लाभार्थियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। संभावना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस भर्ती घोटाले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।