पोकरण. जल स्वालंबन अभियान चलाकर बारिश के पानी को संरक्षित करने के नाम पर जिले में भले ही लाखों रुपए खर्च कर दिए गए है, लेकिन पोकरण के परपरांगत पेयजल स्त्रोत अभी भी उपेक्षा का दंश झेलने को मजबूर है। हालात ये है कि यहां के पोरख व तालाबों के घाट व आगोर की बदहाल स्थिति होने से इनका अस्तित्व खतरे में है। गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना का संचालन कर परंपरागत पेयजल स्त्रोतों के रख रखाव व बारिश के पानी का संग्रहण कर उसे पीने के लिए उपयोग लेने तथा परंपरागत पेयजल स्त्रोतों का संरक्षण करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जबकि कस्बे के मुख्य तालाब व परंपरागत पेयजल स्त्रोत लम्बे समय से उपेक्षा के शिकार होने से उनका अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। जिसको लेकर सरकार, स्थानीय प्रशासन, नगरपालिका की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे है। गौरतलब है कि सैंकड़ों वर्षों तक पोकरण कस्बे में निर्मित तालाब यहां के परंपरागत पेयजल स्त्रोत रहे है। जिनमें महासागर, सालमसागर, रामदेवसर, बांदोलाई, सूधलाई, साधोलाई, मेहरलाई, परबतसर आदि कस्बे के मुख्य तालाब है। इन तालाबों में बारिश के दौरान जल संग्रहण किया जाता था तथा वर्षभर कस्बेवासी उसका पेयजल के रूप में उपयोग करते थे।