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स्टांप पेपर पर 6 से 8 लाख में बिक रही हैं राजस्थान की लड़कियां

राजस्थान की लड़कियों की इज्जत अब दिनदहाड़े स्टांप पेपर पर लिखकर नीलाम की जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि लड़की जितनी छोटी कीमत उतनी ज्यादा। ऐसे में आठ से 18 साल की लड़की देह की मंडी में उतरी जा रही हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नेपाल, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र के बाद अब लड़कियों के बेचने का कलंक राजस्थान के भी माथ पर मढ़ गया है। राजस्थान की लड़कियों की इज्जत अब दिनदहाड़े स्टांप पेपर पर लिखकर नीलाम की जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि लड़की जितनी छोटी कीमत उतनी ज्यादा। ऐसे में आठ से 18 साल की लड़की देह की मंडी में उतरी जा रही हैं।

इन लड़कियों को उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, मुंबई व दिल्ली ही नहीं बल्कि विदेशों तक भेजा जा रहा है और गुलाम के रूप में उनका शोषण हो रहा है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सामने दो ऐसे मामले ध्यान में आए हैं। इसमें से एक मामले में 6 और 8 लाख में लड़कियां बेची गई। भीलवाड़ा के मामले में पांच लड़कियां बेचनी पड़ी। वहीं के एक दूसरे मामले में पीड़ित की बेटी को तीन बार बेचा और वह चार बार गर्भवती हो गई।


विदेश भेजी जा रही हैं लड़कियां
देह की मंडी में अरबी शेखों को अब तक आंध्रप्रदेश और केरल की लड़कियां भा रही थी लेकिन अब इनकी की निगाह राजस्थान के करीब आधा दर्जन जिलों पर अटक गई है। इन दोनों राज्यों में सख्ती के कारण देह के दलालों के लिए राजस्थान सबसे सस्ता और मुफीद साबित हो रहा है। ऐसे में यहां से लड़कियों की तस्करी शुरू हो गई है।

लड़की का इंकार तो मां से बलात्कार
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) के संज्ञान में यह मामला आया है कि ऐसे में अगर कोई लड़की देह के दलदल में उतरने से मना कर दे रही है तो उसकी मां का बलात्कार किया जा रहा है। इसका असर यह हो रहा है मां की दुर्गति न हो इसके लिए नाबालिग लड़किया मान जा रही हैं।

चार सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
लड़कियों की कथित नीलामी और इनकार करने पर जाति पंचायत के फरमान पर मां से बलात्कार की शिकायतों को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मुख्य सचिव के जरिए राज्य सरकार से 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही, पुलिस महानिदेशक से ऐसी शिकायतों पर की गई कार्रवाई के बारे में रिपोर्ट मांगी है।

प्रथा का पता लगाने आएंगे प्रतिनिधि

अब आयोग प्रचलित प्रथा व घटनाओं का पता लगाने प्रभावित क्षेत्रों में अपना प्रतिनिधि भी भेजेगा। एनएचआरसी ने स्वत: संज्ञान लेकर यह आदेश दिया। आयोग को जानकारी मिली कि राजस्थान के आधा दर्जन जिलों में 8 से 18 वर्ष तक की लड़कियों का स्टाम्प पेपर पर बेचान कर पैसे की वसूली की जाती है तथा विवाद होने पर जाति पंचायतें उनकी माताओं के साथ बलात्कार का फरमान सुनाती हैं।