
नागौरी अश्वागंधा को मिला जीआई टैग। फाइल फोटो पत्रिका
Rajasthan GI Tag : राजस्थान के लिए खुशखबर। 'नागौरी अश्वगंधा' को जीआई टैग मिला। इस प्रकार अब तक राजस्थान के 22 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुके हैं। राजस्थान के इन उत्पादों को जीआई टैग मिला चुका है, जानिए।
तो राजस्थान में भौगोलिक संकेतक, जीआई टैग यानि की GITag की कहानी की शुरुआत वर्ष 2005 में शुरू हुई। जब कोटा डोरिया (Kota Doria) को राजस्थान का पहला जीआई टैग दिया गया है। कोटा डोरिया राजस्थान के कोटा और उसके आस-पास के इलाकों (मुख्यतः कैथून) में बनने वाला एक हल्का, महीन और जालीदार कपड़ा है, जो सूती (कॉटन) और रेशम (सिल्क) के धागों से बुना जाता है। बस इसके बाद राजस्थान की तमाम मशहूर वस्तुओं के संरक्षण के लिए जीआई टैग देने का सिलसिला चल निकला।
1- कोटा डोरिया (Kota Doria) - हस्तशिल्प (टेक्सटाइल)- मार्च 2005
2- जयपुर की ब्लू पॉटरी - (हस्तशिल्प) - 2009
3- बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट (Bagru Hand Block Print) - हस्तशिल्प - 2010
4- सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंट (Sanganeri Hand Block Print) - हस्तशिल्प - 2010
5- बीकानेरी भुजिया - 2009-2010 - यह टैग 2028 तक वैध है
6- कोटा डोरिया लोगो (Kota Doria) - 2010
7- पोकरण पॉटरी (Pokaran Pottery) - हस्तशिल्प - 2018
8- सोजत मेहंदी (Sojat Mehndi) - कृषि उत्पाद - 2021
9- नाथद्वारा पिछवाई चित्रकला (Nathdwara Pichhwai Painting) - हस्तशिल्प - 2023
10- उदयपुर कोफ्तगिरी धातु शिल्प (Udaipur Koftgari Metal Craft) - हस्तशिल्प - 2023
11- जोधपुर बंधेज क्राफ्ट (Jodhpur Bandhej Craft) - हस्तशिल्प - 2023
12- बीकानेर कशीदाकारी क्राफ्ट (Bikaner Kashidakari Craft) - हस्तशिल्प - 2023
13- बीकानेर उस्ता कला (Bikaner Usta Art) - हस्तशिल्प - 2023
14- थेवा कला (Thewa Art) - हस्तशिल्प
15- मकराना मार्बल (Makrana Marble) - प्राकृतिक सामग्री
16- फुलकारी - हस्तशिल्प
17- जयपुर ब्लू पॉटरी (लोगो) (Blue Pottery of Jaipur) -
18- राजस्थान की कठपुतली - हस्तशिल्प
19- मोलेला टेराकोटा शिल्प (Molela Clay Work) - हस्तशिल्प
20- कठपुतली (लोगो) (Kathputlis of Rajasthan) - हस्तशिल्प
21- सांगरी या केर सांगरी - 2025
22- अश्वागंधा नागौर - कृषि उत्पाद - 2026।
जीआई (GI) टैग, यानी भौगोलिक संकेत (Geographical Indication) टैग, एक चिह्न या नाम है जो किसी उत्पाद को उसकी विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति और उससे जुड़े खास गुणों, गुणवत्ता या प्रतिष्ठा से जोड़ता है। जीआई टैग उस उत्पाद को नकली उत्पादों से बचाता है। उसके निर्माताओं को कानूनी सुरक्षा व बेहतर दाम दिलाता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। भारत में वस्तुओं का भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत देश का पहला जीआई-टैग प्राप्त उत्पाद 2004-05 में दार्जिलिंग चाय को दिया गया था।
कानूनी सुरक्षा
आर्थिक समृद्धि
उपभोक्ता विश्वास
सांस्कृतिक संरक्षण।
Updated on:
08 Jan 2026 03:23 pm
Published on:
08 Jan 2026 03:20 pm
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