
राजस्थान में अब प्राइवेट कंपनी करेगी सरकार का प्रचार, 10 करोड़ में ठेका
पंकज चतुर्वेदी / जयपुर. जनता के बीच राजस्थान और खुद की 'सूरत' चमकाने के लिए सरकार ने अपने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग को छोड़कर अब निजी 'हाथों' पर भरोसा किया है। देश-प्रदेश में सरकार की छवि बनाने के लिए अब निजी फर्म को ठेका दिया जाएगा। दो वर्ष तक इस फर्म के जरिए जनसम्पर्क गतिविधियों के संचालन पर सरकार 10 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसके लिए निविदा भी जारी कर दी गई है।
यह फर्म सरकार के विभिन्न विभागों के साथ तालमेल से अपना काम करेगी। सरकारी निर्णयों और अन्य खबरों का मीडिया में प्रचार-प्रसार का काम अब तक केवल डीपीआर करता था। सरकार के इस महकमे में करीब 100 अनुभवी जनसंपर्क कर्मी और इतना ही अन्य स्टाफ है। जिसका काम मूलत: सरकार का प्रचार प्रसार करना है। यह काम अब इस फर्म के जरिए होगा। सामान्य प्रेस रिलीज जारी करने के अलावा प्रमुख मीडिया संस्थानों में मुख्यमंत्री एवं अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साक्षात्कार, उन्हें प्रकाशित-प्रसारित कराने की जिम्मेदारी इसी फर्म की होगी। शर्तों के अनुसार आवश्यकता पडऩे पर क्राइसिस मैनेजमेंट तक की जिम्मेदारी सरकार ने इस फर्म को सौंपी है।
पहले भी हुई थी कोशिश
वर्ष 2016 में भाजपा सरकार ने भी जनसम्पर्क का कार्य आउटसोर्स करने की योजना बनाई थी। हालांकि जनसपर्क कर्मियों के आपत्ति जताने के बाद कदम वापस खींच लिया गया। इससे पहले निवेश प्रोत्साहन के लिए रिसर्जेंट राजस्थान सम्मिट के दौरान भी कार्यक्रम के बारे में प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी एक निजी फर्म को दी जा चुकी है।
ये होंगी प्रमुख जिम्मेदारियां
- विभिन्न सरकारी घोषणाएं और गतिविधियों के प्रेस रिलीज जारी करना।
- हर माह मंत्रियों और अधिकारियों का कम से कम एक साक्षात्कार कराना।
- सरकार से संभावित सवालों के जवाब तैयार करना।
- मीडिया में आई खबरों पर रिपोर्ट तैयार करना।
सीएमओ से समन्वय
निविदा शर्तों के अनुसार यह निजी फर्म सरकार के विभिन्न नीति-कार्यक्रमों के प्रमोशन के लिए लगातार मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ समन्वय रखेगी। फर्म के प्रदर्शन के आकलन के लिए स्टीयरिंग कमेटी भी होगी।
Published on:
20 Nov 2019 08:00 am
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