Rajasthan Government's Criminal Laws (Rajasthan Amendment) Ordinance:बचाव मुद्रा में सरकार
सीआरपीसी में बदलाव कर भ्रष्ट लोकसेवकों को बचाने वाले सरकार के विधेयक का विधानसभा और सड़कों पर विरोध देखने को मिला। विधानसभा में कांग्रेस सहित पूरे प्रतिपक्ष ने एकजुटता के साथ इस संशोधन को काला कानून करार दिया। सत्तापक्ष के विधायक घनश्याम तिवाडी और माणकचंद सुराणा ने भी इसका विरोध करते हुए सरकार पर आपातकाल जैसी स्थिति बनाने का आरोप लगाया। तिवाड़ी तो अपनी ही पार्टी के विधेयक के खिलाफ सदन से वॉक आउट कर गए।
विधानसभा में हंगामे के बीच ही सरकार की तरफ से सीआरपीसी और आईपीसी में संशोधन विधेयक सहित छह विधेयक रखे गए। हालांकि चौतरफा विरोध को देखते हुए सरकार इस कानून को लेकर बैकफुट पर भी नजर आई। सरकार की तरफ से गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने संशोधन विधेयक को रखते हुए कहा कि यदि इसमें कोई खामियां होगी तो उसे दूर किया जाएगा। इससे पहले इस कानून के विरोध में कांग्रेस विधायक मुंह पर काली पट्टी और गले में तख्तियां लटका कर विधानसभा पहुंचे। इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक राज्यपाल कल्याण सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन भी देंगे।
विधानसभा में हंगामा
विधानसभा सत्र शुरु होते ही सदन में हंगामें की शुरूआत हो गई और कांग्रेसी विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी के नेतृत्व में बोलना शुरू कर दिया। इसी विधायक तिवाड़ी ने विधानसभा अध्यक्ष से व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए बोलने की अनुमति मांगी, लेकिन अध्यक्ष ने अनुमति से इनकार कर दिया। इसके बाद तिवाड़ी ने भी अपनी ही पार्टी के अध्यादेश के खिलाफ सदन से वॉक आउट कर दिया। तिवाड़ी थोड़ी देर बार विधानसभा में वापस लौट आए।
इसी के साथ निर्दलीय विधायक माणकचंद सुराना ने भी अध्यादेश को इमरजेंसी का पर्याय बताते हुए कहा कि हम पर सवाल उठते हैं या आरोप लगते हैं तो लगने दे लेकिन ऐसे कानून आप नहीं बनाए। सारे विरोध के बीच कटारिया ने अधयादेश मंजूरी के लिए सदन की मेज पर रख दिया और इस पुरस्थापित भी कर दिया गया।
आधा दर्जन विधेयक
सरकार की ओर से इस सत्र में आधा दर्जन विधेयक रखे जाएंगे। विधेयकों में गुर्जरों सहित पांच जातियों को ओबीसी में अलग से पांच फीसदी आरक्षण देने व सर्वण आरक्षण को लेकर भी संकल्प पारित किया जाएगा। वहीं विधायकों ने इस छोटे से सत्र में 1200 से ज्यादा सवाल लगाए हैं।
कांग्रेस का मार्च
कांग्रेसी विधायकों ने पश्चिमी द्वार के सामने विधायक आवास से पैदल मार्च निकालकर विधानसभा पहुंचे। विधानसभा के गेट पर कांग्रेसी विधायकों की सुरक्षा अधिकारियों से तीखी नोकझोंक भी हो गई। कांग्रेसी विधायकों ने सरकार पर पुलिस के जरिए बंधक बनाने और धमकाने का आरोप लगाया। विधायकों ने कहा कि पुलिस कर्मी लगातार धमाका रहे हैं।
इमरजेंसी कांग्रेस की देन थी तो ये सरकार क्या कर रही है। भ्रष्ट लोक सेवको के खिलाफ जन प्रतिनिधियों का भ्रष्टाचार उजागर होता है तो होने देना चाहिए। आखिर चुनाव से एक साल पहले इस कानून को लाने की जरूरत ही क्या पडी। कोई भी केन्दीय कानून में संशोधन राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना नहीं किया जा सकता। -माणकचंद सुराणा, विधायक
सरकार काला कानून ला रही है और अभी से विधायकों तक को धमकाया जा रहा है पुलिस के जरिए बंधक बनाने की कोशिश कर रहे हैं सरकार को विधायकों केा धमकाने वाले पुलिस अधिकारी को बर्खास्त करना चाहिए।-गोविंद सिंह डोटासरा,मुख्य सचेतक, कांग्रेस विधायक दल
यह एक काला कानून है इसका हम विरोध करते हैं राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का भी आभार है जो इस मुद्दे को उठा रहे हैं। -घनश्याम तिवाड़ी, भाजपा वरिष्ठ विधायक