
प्रदेश में सरकार के मत्स्य विभाग ने रंगीन मछलियों का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए टोंक जिले के चंदलाई स्थित राजकीय फार्म में रंगीन मछलियों से जुड़ा प्रोजेक्ट अगले साल से काम करना शुरू कर देगा। तो वहीं ऑर्नामेंटल फिश यानि की सजावटी मछलियों के उत्पादन का यह प्रोजेक्ट सीएम के ड्रीम प्रोजेक्टों में से बताया जा रहा है। जबकि इस पूरे प्रोजेक्ट प्रदेश की सरकार को लगभग 4 करोड़ रुपए का खर्च उठाना पड़ेगा।
दरअसल, राजस्थान सरकार द्वारा अपनी तरह का पहला सजावटी मछली प्रजनन केन्द्र टोंक के बीसलपुर में तैयार करवाया जा रहा है। और फिर अगले साल से यहां मछली प्रजनन और उत्पादन पर काम शुरू हो जाएगा। वहीं सरकार किसानों को इस अहम प्रोजेक्ट से जोड़कर उनकी आय को दोगुना कर उनकी मदद करने पर भी विचार कर रही है। करीब 4 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में अभी लगभग पौने तीन करोड़ रुपए खर्च हो चुका है।
टोंक जिले में स्थित इस फार्म में फिलहाल रंगीन मछलियों के पालन के लिए घर बनाए जा रहे हैं। जिसमें खासतौर पर गप्पी, मोलीज, प्लेटीज, स्वार्डटेल, डेनियोस, रसबोरास, बारबस और गोल्ड फिश समेत लगभग 200 प्रकार की प्रजातियों का उत्पादन किया जाएगा। आपको बता दें कि वास्तुशास्त्र के लिहाज से रंगीन मछलियों को घर के लिए शुभ माना जाता है। लोग इन्हें अपने घर में एक्वेरियम में रखते हैं। कार्यालयों और भवनों में सजावटी एक्वेरियम की डिमांड भी रहती है।
जबकि ऐसा माना जाता है कि रंगीन मछलियों को घर में रखना वास्तुशास्त्र के हिसाब से शुभ होता है। इन्हें घर में रखने से कई तरह के संकटों का निवारण होता है। ऐसे में सरकार इन मछलियों की ब्रीडिंग, इनके उत्पादन और मार्केटिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है। बीसलपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑर्नामेंटल फिश की स्थापना होगी। यहां किसानों को रंगीन मछली पालन की पूरी जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी।
प्रदेश की सरकार केरल की तर्ज पर मछलियों के उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। प्रदेश में हनुमानगढ श्रगंगानगर के नहर लॉजिंग क्षेत्र के साथ ही सांभर के खारे पानी क्षेत्र में भी सजावटी मछलियों के पालन को बढावा दिया जाएगा। टोंक के चंदलाई में 2.75 करोड़ की लागत से फॉर्म पोण्ड बनाने का काम भी पूरा हो चुका है। यहां मछलियों की ब्रिडिंग होगी। यहां से रंगीन मछलियों के निर्यात की भी सरकार की योजना है। तो वहीं इस मामले पर राज्य के कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य पालन मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी ने अपनी राय भी जाहिर की।
Published on:
21 Oct 2017 06:44 pm
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