– किसानों के आंदोलन के बाद चेता सरकार, किया फैसला
जयपुर। पूरे मार्च महीने में भाखड़ा नहर से सिंचाई के लिए पानी चलाने की मांग को लेकर किसानों ने बुधवार को जल संसाधन विभाग कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान किसानों ने कहा कि यदि फसलों को इस समय सिंचाई पानी नहीं मिला तो रबी फसलें बर्बाद हो जाएगी। पूरे दिन चले आंदोलन के बाद मुख्य अभियंता अमरजीत सिंह मेहरड़ा के साथ किसानों की दो दौर की वार्ता हुई, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बनी। मांगों पर जल्द सहमति नहीं बनने पर दोगुनी ताकत के साथ 15 मार्च को प्रदर्शन करने की चेतावनी देकर किसानों ने धरना समाप्त कर दिया। इससे पहले किसानों के आक्रोश को देखते हुए मौके पर पुलिस का जाब्ता तैनात रहा। किसानों ने बताया कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना में बंदी के चलते भाखड़ा परियोजना की नहरों में सिंचाई पानी बारह मार्च से बंद कर दिया गया है। इसके विरोध में भाखड़ा के किसानों ने जल संसाधन विभाग उत्तर खंड हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता कार्यालय के समक्ष महापड़ाव डाल दिया। इस मौके पर किसान नेता ओम जांगू ने कहा कि रबी फसलों को इस समय एक सिंचाई बारी पानी मिलना जरूरी है। नहीं तो फसलेे बर्बाद हो जाएगी। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रेशम सिंह मानुका ने कहा कि भाखड़ा परियोजना की नहरों में 31 मार्च तक सिंचाई पानी चलाने की मांग किसान कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 31 मार्च तक भाखड़ा की नहरों में पानी नहीं चलाया गया तो किसान आंदोलन को तेज करेंगे।
जंक्शन में जल संसाधन विभाग कार्यालय में पूरे दिन चले आंदोलन के बाद देर शाम को जयपुर से मौखिक संदेशा आया। इसमें भाखड़ा नहर में 30 मार्च तक पानी बढ़ाने की का जिक्र था। इसके कुछ देर बाद नहर में पानी की मात्रा बढऩी भी शुरू हो गई। जानकारी के अनुसार 12 मार्च को भाखड़ा नहर में 650 क्यूसेक पानी चल रहा था। जबकि 13 मार्च रात करीब आठ बजे भाखड़ा नहर में पानी की मात्रा बढ़ाकर 850 क्यूसेक कर दिया गया। इस तरह नहर में पानी की मात्रा बढऩे से किसान खुश नजर आए।