
राजस्थान में जोजोबा के तीन सरकारी फार्म
कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि राज्य में जोजोबा की खेती के लिए 3 राजकीय फार्म स्थापित हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में राज्य के झुंझुनूं जिले में 27 और बीकानेर के 9 कृषक सहित कुल 36 कृषक जोजोबा की खेती कर रहे हैं। इसी प्रकार हनुमानगढ़, चूरू और बीकानेर जिलों में कुल 32.26 हैक्टेयर भूमि पर 24 किसान जोजोबा की खेती कर रहे हैं।
विधानसभा में कृषि मंत्री ने दी जानकारी
कटारिया प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि यह योजना 1994 में प्रारंभ की गई थी। योजना के प्रथम चरण में केन्द्र सरकार की ओर से 3 करोड़ 14 लाख 48 हजार रुपए स्वीकृत किए गए और उद्यान स्थापित करने के लिए भूमि राज्य सरकार की ओर से दी गई।
दूसरे चरण के लिए 73 लाख का अनुदान
योजना के द्वितीय चरण के लिए केन्द्र सरकार की ओर से 73 लाख 71 हजार रुपए का अनुदान दिया गया। इस प्रकार यह योजना कुल 3 करोड़ 87 लाख 69 हजार रुपए लागत की है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों से इस योजना में कोई प्रगति नहीं हुई है।
एक संस्था कर रही 25 वर्षों से काम
इससे पहले विधायक सतीश पूनियां के मूूल प्रश्न के जवाब में कटारिया ने बताया कि राज्य में जोजोबा की खेती के लिए दी एसोसिएशन ऑफ राजस्थान जोजोबा प्लांटेशन एंड रिसर्च प्रोजेक्ट जयपुर नामक संस्था 30 नवंबर 1994 से कार्य कर रही है। इस संस्था की तरफ से राजकीय भूमि पर विगत 3 वर्षों में कोई नया जोजोबा उद्यान स्थापित नहीं किया गया।
रखरखाव पर किए जा रहे लाखों खर्च
संस्था के पूर्व में स्थापित जोजोबा उद्यानों पर रखरखाव के लिए 2017-18 में 13 लाख 39 हजार, वर्ष 2018-19 में 13 लाख 87 हजार रुपये तथा वर्ष 2019-20 में 8 लाख 67 हजार रुपये (10 फरवरी 2020 तक) खर्च किए गए हैं।
किसानों को दिया जा रहा है अनुदान
उन्होंने बताया कि किसानों के खेत पर नये जोजोबा उद्यान स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-वृक्ष जनित तिलहन योजना के अन्तर्गत वर्ष 2017-18 में 10 लाख 69 हजार रुपये, वर्ष 2018-19 में 27 लाख 25 हजार रुपये तथा वर्ष 2019-20 में 2 लाख 50 हजार (10 फरवरी, 2020 तक) रुपए अनुदान दिया गया।
संस्था के खर्च का दिया हिसाब
कटारिया ने बताया कि संस्था में श्रमिकों के नियोजन हेतु वित्त विभाग के निर्देश के मुताबिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है। संस्था की ओर से पंप सेट और ट्रेक्टर के उपयोग के लिए दस हजार से अधिक का डीजल खरीदा गया।
दो साल से नहीं हो रहा खर्च
इसके अलावा दस हजार से अधिक खर्च और निविदा जारी की गई जिसमें वर्ष 2017-18 में कुछ खर्च नहीं हुआ, 2018-19 में 18 हजार 372 रुपये में नर्सरी के लिए पॉली बेग खरीदे गए, जिनकी निविदा 6 जून, 2018 को जारी की गई तथा वर्ष 2019-20 में कोई खर्च नहीं किया गया है।
माइनस तीन से 55 डिग्री तापमान झेल सकता है
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो जोजोबा का झाड़ीनुमा पौधा माइनस तीन से 55 डिग्री तक तापमान झेल सकता है। इसे न तो उपजाऊ जमीन की जरूरत है और न ही अधिक पानी की। खराब जमीनी पानी में भी यह पनप सकता है।
सौंदर्य प्रसाधन सामग्री में इस्तेमाल होता जोजोबा
जोजोबा के तेल का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन बनाने में होता है। तेल निकालने के बाद बचे मैटेरियल को सल्फर से ट्रीट करने पर ल्यूब्रिकेंट बनता है, जिसका उपयोग मशीनों-हवाई जहाज में होता है।
छठे साल में मिलता है फल
इसकी खेती आसान तो है, पर इसमें किसान के धैर्य की परीक्षा होती है क्योंकि छठे साल में फल मिलता है। जहां पानी रुकता है, वहां जोजोबा नहीं पनपता। प्रदेश में इसके टिश्यू कल्चर की व्यवस्था भी नहीं है।
Published on:
13 Mar 2020 07:26 pm
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