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Rajasthan: फाइलों में महिलाओं की निजी तस्वीरें खुली रखने पर रोक, राजस्थान हाईकोर्ट ने जारी किए सख्त निर्देश

Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट ने महिला सुरक्षा, निजता और गरिमा से जुड़े मामले में कहा कि किसी भी राष्ट्र का आकलन उसके जीडीपी या कानूनों से नहीं होती, बल्कि पुलिस स्टेशन, अदालत कक्ष और सोशल मीडिया पर महिलाओं के साथ किए जाने वाले व्यवहार से होता है।

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राजस्थान हाईकोर्ट। पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने महिला सुरक्षा, निजता और गरिमा से जुड़े मामले में कहा कि किसी भी राष्ट्र का आकलन उसके जीडीपी या कानूनों से नहीं होती, बल्कि पुलिस स्टेशन, अदालत कक्ष और सोशल मीडिया पर महिलाओं के साथ किए जाने वाले व्यवहार से होता है। कोर्ट ने कहा, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत महिला की निजता और गरिमा अलग अधिकार नहीं, बल्कि एक-दूसरे की ढाल और आत्मा हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्ती बररते हुए कहा है कि पीड़िता की निजी फोटो-वीडियो खुले तौर पर अदालत में दाखिल करना बर्दाश्त नहीं होगा। ऐसा करना महिलाओं की गरिमा व गोपनीयता का उल्लंघन है। यह सामग्री केवल सीलबंद लिफाफे में या पासकोड लॉक इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर में ही दाखिल की जाएगी।

हाईकोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने का न्यूनतम संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। अदालत ने कहा, जब जांच ही अपमान में बदल जाए, तो कानूनी प्रक्रिया स्वयं में एक सजा बन जाती है और जब अदालती ट्रायल सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने का जरिया बन जाए, तो अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन होता है।

कोर्ट में खुले तौर पर पेश कर देते हैं निजी तस्वीरें

अदालत ने नोटिस किया कि अक्सर आरोपी या उनके वकील खुद के बचाव में यह दिखाने के लिए कि दोनों पक्षों के बीच संबंध सहमति से थे, ऐसी निजी तस्वीरें और वीडियो जांच अधिकारी या अदालतों के समक्ष खुले तौर पर पेश कर देते हैं। यह न केवल महिला की निजता पर हमला है, बल्कि खुली फाइलों के जरिए पीड़िता की पहचान को सार्वजनिक डोमेन में उजागर करता है। चूंकि ये फाइलें जांच एजेंसी के कार्यालय से लेकर कोर्ट रूम और रजिस्ट्री तक कई हाथों से गुजरती हैं, इसलिए इनका दुरुपयोग होने, सोशल मीडिया या इंटरनेट पर वायरल होने की पूरी आशंका रहती है, जो किसी भी महिला के वर्तमान, भविष्य और उसके वैवाहिक जीवन को पूरी तरह तबाह कर सकता है।

सभी याचिकाओं की सख्त जांच के निर्देश

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को यौन अपराधों से संबंधित सभी याचिकाओं की सख्त जांच करने का निर्देश दिया है, ताकि पीड़िता का नाम, पता, फोटो या सोशल मीडिया विवरण कहीं भी उजागर न हो। वहीं रजिस्ट्रार न्यायिक को कहा है कि वे इस मामले को प्रशासनिक रूप से मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखें, ताकि पूरे राज्य के लिए स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किए जा सकें। इसके अलावा रजिस्ट्रार जनरल को सभी न्यायिक अधिकारियों को भी यह आदेश भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एसीएस होम, डीजीपी, पुलिस महानिदेशक, मुख्य विधि सचिव और अभियोजन विभाग के निदेशक को आदेश की प्रति भेजकर सभी थानों के एसएचओ को सूचित करने के लिए कहा है।