
फाइल फोटो पत्रिका
Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने होमगार्ड जवानों की नियुक्ति को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए अनुभवी जवानों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुभवी होमगार्ड जवानों और नए अभ्यर्थियों की स्क्रीनिंग एक साथ नहीं की जा सकती, क्योंकि दोनों की योग्यता और अनुभव में अंतर है।
न्यायाधीश मुन्नूरी लक्ष्मण ने झलकन सिंह राठौड़ सहित 263 अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने निर्देश दिए कि यदि पद रिक्त हैं, तो नियुक्ति प्रक्रिया में अनुभवी जवानों को प्राथमिकता दी जाए। सुनवाई के दौरान सामने आया कि हाईकोर्ट ने 2020 में भी होमगार्ड जवानों को पुनः सेवा में लेने के आदेश दिए थे, लेकिन उनकी पालना नहीं होने पर याचिकाकर्ता फिर से कोर्ट पहुंचे।
प्रकरण में यह तथ्य भी उजागर हुआ कि 81 अनुभवी जवानों की स्क्रीनिंग तो कर ली गई, लेकिन परिणाम जारी नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि अनुभवी और नए अभ्यर्थियों की बराबरी नहीं हो सकती, इसलिए उनकी स्क्रीनिंग अलग होनी चाहिए।
वहीं, सरकार ने दलील दी कि अदालती आदेश पर ही स्क्रीनिंग की गई है और पात्रता व पद खाली होने पर ही नियुक्ति संभव है। हाईकोर्ट ने अब याचिकाओं का निस्तारण करते हुए अनुभवी जवानों के पक्ष में निर्देश जारी किए हैं।
एक अन्य फैसले में बी-2 बाइपास स्थित श्रीराम कॉलोनी से जुड़ी विवादित करीब 42 बीघा जमीन के मामले में हाईकोर्ट ने हाउसिंग बोर्ड के पक्ष में फैसला दिया है। कोर्ट ने जेडीए की ओर से 29 मई 1995 को दी गई योजना स्वीकृति और इसके बाद के आदेशों को अवैध माना है। 31 जुलाई 1981 के समझौता विक्रय को भी अवैध मानते हुए शून्य घोषित कर दिया।
जस्टिस गणेश राम मीणा ने बोर्ड की याचिका मंजूर करते हुए निजी पक्ष की 3 याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि संबंधित भूमि के अधिग्रहण की कार्रवाई बोर्ड के पक्ष में पूर्ण मानी जाएगी। समझौता विक्रय से स्वामित्व हस्तांतरित नहीं होता। धोखाधड़ी से प्राप्त कोई भी आदेश, भले वह अंतिम रूप ले चुका हो, वैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि 12 फरवरी 2002 को एकलपीठ से गलत तथ्यों के आधार पर आदेश प्राप्त किया गया था, इसलिए रद्द किया जाता है।
Updated on:
11 Apr 2026 09:56 am
Published on:
11 Apr 2026 08:39 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
