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राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की गिरफ्तारी पर 11 सितंबर तक लगाई रोक, जानें मामला क्या है?

Rajasthan High Court Order : राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की गिरफ्तारी पर 11 सितंबर तक रोक बढ़ा दी है। जानें मामला क्या है?    

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Union Minister Gajendra Singh Shekhawat

Sanjivani Society scam : राजस्थान हाईकोर्ट ने संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी घोटाले में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर 11 सितंबर तक रोक बढ़ा दी है। राजस्थान हाईकोर्ट ने सीबीआई को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। न्यायाधीश कुलदीप माथुर की एकल पीठ में राजस्थान सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल जोशी ने दलीलें रखीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी.आर. बाजवा ने मामले की जांच सीबीआई से करवाने को लेकर कानूनी पहलू बताए। डिप्टी सॉलिसिटर जनरल मुकेश राजपुरोहित ने सीबीआई की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा। जिसे राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 11 सितंबर तय की है।



वकील आपस में उलझे, हाईकोर्ट नाराज

संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड घोटाले मामले में एसओजी की ओर से दायर एफआईआर के खिलाफ केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की विविध आपराधिक याचिका पर सुनवाई हुई। 1 घंटे चली सुनवाई में दोनों पक्षों के वकील आपस में उलझ गए। और इस पर राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ के जस्टिस कुलदीप माथुर ने अपनी नाराजगी जाहिर की। जस्टिस कुलदीप माथुर ने वकीलों को पूरी तरह से तैयार होकर आने की बात कही।

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राजस्थान में भी मामले को सीबीआई को सौंपा जाएं, सीबीआई वकील की मांग

राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई वकील ने कोर्ट को बताया कि गुजरात व मध्यप्रदेश में संजीवनी क्रेडिट कोआपरेटिव के खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है। ऐसे में दोनों राज्य सरकारों ने नोटिफिकेशन जारी कर सीबीआई को जांच सौंपी है। और सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर जांच भी शुरू दी। राजस्थान में भी मामले को सीबीआई को सौंपा जाए।

संजीवनी घोटाला क्या है जानिए?

संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी को राजस्थान सोसायटी एक्ट के तहत 2008 के तहत रजिस्टर्ड कराया गया था। फिर वर्ष 2010 में इसे सोसायटी मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी के रूप में बदल दिया गया। निवेशकों को अच्छे रिटर्न का लालच दिया गया। इस घोटाले के मास्टरमाइंड सोसायटी के प्रथम प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह थे। तकरीबन करीब 1 लाख लोगों ने इस सोसायटी में करीब 900 करोड़ रुपए का निवेश किया था, पर बाद में सोसायटी ने पैसा वापस नहीं किया।

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