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बीमारियाें का नाैतपा, लू आैर डेंगू के बाद अब सामने आर्इ ये घातक बीमारी

नौतपा शुरू होने के साथ ही एसएमएस समेत सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के पीडि़तों की संख्या बढ़ गई है।

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जयपुर। नौतपा शुरू होने के साथ ही एसएमएस समेत सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के पीडि़तों की संख्या बढ़ गई है। अस्पतालों में स्वाइन फ्लू और डेंगू के साथ ही उल्टी दस्त के गंभीर संक्रमण वाले मरीज भी पहुंच रहे हैं। इनमें कुछ तो ऐसे भी हैं, जिनमे कुछ घंटों के अंतराल में ही मरीज को भारी उल्टी दस्त के बाद रक्तचाप तेज से नीचे गिर रहा है और मरीज अचेत अवस्था तक पहुंच रहा है। नौतपा के बाद से ही अस्पतालों में ऐसे रोगियों की संख्या 40 फीसदी बढ़ी है।

गर्मी में भी पांव पसार रहीं खतरनाक बीमारियां
एसएमएस अस्पताल में इस साल डेंगू ने स्वाइन फ्लू को भी पीछे छोड़ दिया है। डेंगू जनवरी से मई माह में लगातार बढ़ते हुए क्रम में सामने आ रहा है। इस साल जहां स्वाइन फ्लू के 177 मामले आए हैं, वहीं डेंगू के केसों की संख्या 201 हो चुकी है। स्क्रब टायटस के साल की शुरूआती चार माह में ही 94 केस सामने आए हैं। एसएमएस अस्पताल में पिछले तीन साल के रिकॉर्ड को देखे तो एक भी केस चिकनगुनिया का सामने नहीं आया। लेकिन इस साल चार केस ने हलचल बढ़ा दी है।

गर्मी भीषण है, ऐसे रखें सेहत का ख्याल
- तेज धूप से बचें
- दोपहर में खुले में न घूमें
- बासा भोजन नहीं करें
- पहले से कटे हुए फल नहीं खाएं
- ठंडे तरल देसी खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करें
- अधिक से अधिक पानी पीएं
- दुपहरी में दुपहिया वाहन पर अधिक नहीं घूमे
- आंखों पर काला चश्मा लगाा लें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहने

डेंगू के मच्छर का स्वरूप बदला है। पहले बारिश में बीमारी के मरीज सामने आते थे। लेकिन अब सर्दी के बाद गर्मी में मरीज बढ़ रहे हैं। पहले मच्छर साफ पानी में होता था, लेकिन अब रुके हुए, गंदे पानी में मच्छर पैदा हो रहा है। गीली घास में मच्छर अंडे तक दे रहा है। मच्छर का स्वरूप बदलने के कारण गर्मी में डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है।
डॉ. सीएन नवल, विभागाध्यक्ष, मेडिसिन

मौसमी बीमारियों से ग्रसित लोगों का ओपीडी बढ़ा है लेकिन हालात नियंत्रण में हैं।
प्रो. संजीव शर्मा, निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान

मौसमी बीमारियों के मरीज बढऩे लगे हैं। उल्टी-दस्त, उदर संक्रमण, बुखार के मरीज भी बढ़े हैं।
डॉ. स्वाति श्रीवास्तव, एसएमएस मेडिकल कॉलेज

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