
डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (फोटो- पत्रिका)
जयपुर: राजस्थान में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने और परिवहन व्यवस्था को पूर्णतः पारदर्शी बनाने की दिशा में परिवहन व सड़क सुरक्षा विभाग की ओर से तकनीकी नवाचारों से राज्य में सख्त प्रवर्तन और पारदर्शी व्यवस्था की शुरुआत की गई है।
नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के अंतिम दिन राजस्थान के उप मुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने परिवहन व सड़क सुरक्षा विभाग की ओर से राज्य में सड़क सुरक्षा, ई-गवर्नेंस एवं नागरिक सुविधाओं से जुड़े प्रमुख नवाचारों व उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण दिया।
उन्होंने बताया कि परिवहन व सड़क सुरक्षा विभाग ने प्रदेश के 150 से अधिक टोल नाकों पर ई-डिटेक्शन सिस्टम लागू करते हुए बिना परमिट, बिना फिटनेस, बिना टैक्स और बिना पीयूसी वाहनों पर लाखों चालान जारी किए हैं, जिनसे लगभग 500 करोड़ रुपए की जुर्माना राशि वसूली जानी है।
डॉ. बैरवा ने बताया कि खनिज विभाग से ओवरलोड वाहनों के लिए जारी होने वाले ई-रवन्ना को ई-चालान प्रणाली से एकीकृत कर दिया गया है, जिसके लिए 15 दिवस का नोटिस जारी किया गया है। नागरिकों के लिए सभी ऑनलाइन सेवाएं अब केवल सिटीजन पोर्टल के माध्यम से ही उपलब्ध होंगी, कार्यालयों में प्रत्यक्ष एंट्री बंद कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि वाहन सॉफ्टवेयर में डुप्लीकेशन लगभग समाप्त कर दिया गया है व 25 ड्राइविंग ट्रैक को सीएसआर के तहत ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक में बदला जा रहा है, जिनमें से अब तक 8 ट्रैक पूर्णतः ऑटोमेटेड किए जा चुके हैं। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के तहत प्रदेश के सभी 41 जिलों में प्रतिदिन सड़क सुरक्षा गतिविधियों का कैलेंडर तैयार कर एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग, हेल्थ व रिस्पॉन्सिव टेप ड्राइव चलाई जा रही है।
डॉ. बैरवा ने बताया कि मुख्यमंत्री आयुष्मान जीवन रक्षा योजना के अंतर्गत अब तक 215 गुड सेमेरिटन को 10,000 रुपए व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद्र बैरवा ने बताया कि अक्टूबर 2021 से अब तक 1,32,965 सड़क दुर्घटनाएं ई-डार पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी हैं और सभी एफआईआर में ई-डार आईडी को अनिवार्य किया गया है। सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 12 जिलों में स्वयंसेवक चिन्हित किए गए हैं और शेष जिलों में न्यूनतम 20-20 स्वयंसेवक जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि देश के सर्वाधिक दुर्घटना मृत्यु वाले 100 जिलों में से राजस्थान के 8 जिले चिन्हित किए गए हैं, जिनमें प्राथमिकता से कार्ययोजना लागू की जाएगी। बैठक में राजस्थान परिवहन विभाग के आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा, विशिष्ट सहायक भगवत सिंह भी शामिल रहे।
Published on:
08 Jan 2026 10:49 pm
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