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लाखों भक्त, 91 KM पदयात्रा और एक मुराद: 60 साल से चल रही ये डिग्गी यात्रा आखिर किसने और क्यों शुरू की थी ?

Diggi Kalyan Ji Padayatra History: दरअसल सिर्फ एक मुराद के साथ शुरू हुई थी, और इस यात्रा की शुरुआत सिर्फ एक परिवार ने की थी।

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Photo - Patrika

Diggi Kalayan Ji Miracle Story: सावन का महीना और राजधानी जयपुर से डिग्गी कल्याण जी की ओर रवाना होती लाखों श्रद्धालुओं की पदयात्रा—यह दृश्य हर साल धार्मिक आस्था और विश्वास की अद्भुत मिसाल बनकर उभरता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह लक्खी यात्रा, जिसमें करीब 6 लाख जातरू शामिल होते हैं, दरअसल सिर्फ एक मुराद के साथ शुरू हुई थी, और इस यात्रा की शुरुआत सिर्फ एक परिवार ने की थी।

59 साल पहले की वो मुराद

यह कहानी शुरू होती है जयपुर के एक नामी लोहे के कारोबारी रामेश्वर लाल शर्मा से, जिनकी कोई संतान नहीं थी। जब सभी उपाय विफल हो गए, तब किसी ने उन्हें सलाह दी कि वे टोंक जिले के मालपुरा स्थित डिग्गी कल्याण जी मंदिर तक पदयात्रा करें और पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगें। रामेश्वर लाल ने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ ताड़केश्वर महादेव मंदिर (चौड़ा रास्ता, जयपुर) से लगभग 91 किलोमीटर की पैदल यात्रा की और डिग्गी धाम पहुंचकर पूजा-अर्चना की। कुछ समय बाद, चमत्कारिक रूप से रामेश्वर लाल को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उन्होंने अपने बेटे का नाम ‘श्रीजी’ रखा और पहली बार कार से कल्याण जी के दरबार में दर्शन के लिए पहुंचे। उसी दिन से उन्होंने यह संकल्प लिया कि वे हर वर्ष सावन में डिग्गी कल्याण जी की पदयात्रा निकालेंगे—एक व्रत, एक श्रद्धा, और एक आभार के रूप में।

अब बेटा निभा रहा है वादा

रामेश्वर लाल शर्मा का देहांत कुछ वर्ष पूर्व हो गया, लेकिन उनका बेटा श्रीजी शर्मा आज भी उस संकल्प को निभा रहा है। इस वर्ष निकाली गई यात्रा, 60वीं यात्रा है—एक परंपरा जो कभी केवल एक मन्नत से शुरू हुई थी, अब एक लक्खी यात्रा बन गई है।
आज सुबह 9 बजे यह यात्रा फिर से ताड़केश्वर मंदिर से आरंभ हुई। श्रद्धालु न केवल जयपुर से, बल्कि राजस्थान के अन्य जिलों और गुजरात, मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। अनुमान है कि इस बार यह संख्या 6 लाख से अधिक हो सकती है।

91 किलोमीटर की आस्था की डगर

श्रद्धालु 91 किलोमीटर लंबी पदयात्रा में भक्ति गीत, झांकियां और सामूहिक सेवा भाव के साथ चलते हैं। रास्ते भर जगह-जगह सेवाभावी संगठन पानी, चिकित्सा और प्रसाद की व्यवस्था करते हैं। कई लोग अपने निजी वाहनों से भी डिग्गी धाम पहुंचते हैं, लेकिन पदयात्रा का महत्व इसलिए विशेष माना जाता है क्योंकि यह एक तप है, एक भक्ति का प्रतीक है।

वही कार, वही श्रद्धा

दिलचस्प बात यह है कि रामेश्वर लाल शर्मा की वह पुरानी कार, जिसमें वे पहली बार पुत्र प्राप्ति के बाद डिग्गी धाम पहुंचे थे, आज भी हर साल प्रचार रथ के रूप में प्रयोग की जाती है। उस कार को यात्रा से पहले सजाया जाता है और उसी से श्रीजी शर्मा पदयात्रा की शुरुआत करते हैं।

एक यात्रा, अनेक भावनाएं

डिग्गी कल्याण जी की यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास, परंपरा और चमत्कार का ऐसा संगम है, जिसने हजारों परिवारों को जोड़ रखा है। हर जातरू के पास अपनी कोई मुराद है, कोई कथा है, कोई आभार है। और यह यात्रा उन सबका उत्तर बन चुकी है।