27 अप्रैल 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान का रण : चुनाव से पहले कैसे जाने किसकी बनेगी सरकार, बस करिए इस दिन का इंतजार

https://www.patrika.com/rajasthan-news/

2 min read
Google source verification
rajasthan ka ran

राजस्थान का रण : चुनाव से पहले कैसे जाने किसकी बनेगी सरकार, बस करिए इस दिन का इंतजार

जयपुर. चुनावी रण की पहली प्रक्रिया होती है - पर्चा भरना और अंतिम - चुनाव परिणाम। कहने को तो इस पहली और आखिरी प्रक्रिया में इतना ही संबंध होता है कि एक से चुनाव की शुरुआत होती है तो दूसरी पर खत्म। लेकिन राजस्थान की बात करें तो नामांकन की संख्या और चुनाव परिणाम में एक अजब रिश्ता दिखाई पड़ता है। प्रदेश में लोगों की चुनाव लडऩे में दिलचस्पी संकेत कर देती है कि बहुमत किस ओर जाएगा? जी हां, हमने 20 साल यानी पिछले चार विधानसभा चुनावों के आंकड़ों का विश्लेषण कर पाया कि जब-जब चुनाव लडऩे में लोगों का रुझान कम रहा यानी पर्चे कम भरे गए तो बहुमत भाजपा को मिला। वहीं, जब लोगों ने चुनाव लडऩे में ज्यादा रुचि दिखाई यानी पर्चों की तादाद ज्यादा रही तो बहुमत कांग्रेस को मिला, वहीं जब सर्वाधिक पर्चे भरे गए तो परिणाम त्रिशंकु रहे।

ये उदाहरण जो बताते हैं पर्चों से किस तरह जुड़ा है सरकार का गणित
वर्ष 1998 में 11वीं विधानसभा के लिए हुए चुनावों में जब 2,578 नामांकन भरे गए तो कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिला। पार्टी ने 153 सीटों के रूप में रिकॉर्ड जीत दर्ज की और अशोक गहलोत के नेतृत्व में सरकार बनी। वहीं जब 12वीं विधानसभा के लिए 2003 में हुए चुनाव में चुनावी पर्चों का यह आंकड़ा 1998 के मुकाबले साढ़े 14 फीसदी कम हुआ तो भाजपा ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई। वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। भाजपा को इस चुनाव में 120 सीटें मिली थीं।


13वीं विधानसभा के लिए वर्ष 2008 के चुनाव में जब पिछले 10 साल में सर्वाधिक 3181 पर्चे भरे गए तो परिणाम त्रिशंकु रहा। इसमें कांग्रेस को 96 तो भाजपा को 78 सीटें मिलीं। हालांकि बाद में अशोक गहलोत ने बसपा से अलग होकर आए 06 विधायकों के साथ मिलकर कांग्रेस की सरकार बनाई। वहीं 14वीं विधानसभा के लिए वर्ष 2013 में 2008 की तुलना में 2,966 हो गई यानी इसमें पौने सात फीसदी कमी आई तो एक बार फिर भाजपा को बहुमत मिला। इस चुनाव में भाजपा को 163 सीटों के रूप में ऐतिहासिक बहुमत मिला, जो आज तक रिकॉर्ड है।

चुनावी पर्चों की संख्या और परिणाम में नायाब संयोग
- जब पर्चे कम भरे गए तो भाजपा को मिला बहुमत
- ज्यादा नामांकन में बनी कांग्रेस की सरकार
- सर्वाधिक पर्चे भरे गए तो नतीजे आए त्रिशंकु

राजस्थान: चार चुनावों का ट्रेंड ( 1998-2013)
- 1998 में 2,578 पर्चे भरे गए, कांग्रेस को गया बहुमत
- 2003 में साढ़े 14 फीसदी कम हुआ नामांकन, भाजपा ने बनाई सरकार
- 2008 में पर्चों की संख्या रही सर्वाधिक, नतीजे आए त्रिशंकु
- 2013 में नामांकन पौने सात फीसदी गिरा तो फिर भाजपा को मिला बहुमत

पर्चे रद्द होने की तादाद में आई गिरावट
चुनावी प्रक्रियाओं में सुगमता और जागरूकता का नतीजा है कि अब पहले के मुकाबले कम पर्चे खारिज होते हैं। 1998 में जहां कुल भरे गए पर्चों में से 14 फीसदी रद्द हुए थे, वहीं 2013 में यह संख्या घटकर 08 फीसदी रह गई है।
- 358 पर्चे खारिज हुए थे 1998 में
- 210 पर्चे रद्द हुए 2003 में
- 309 रद्द हुए 2008 में
- 252 पर्चे खारिज हुए 2013 में