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राजस्थान का रण : हाथी की सवारी से ही लगेगा बेड़ापार, बिना बसपा तीसरा मोर्चा अधूरा

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राजस्थान का रण : हाथी की सवारी से ही लगेगा बेड़ापार, बिना बसपा तीसरा मोर्चा अधूरा

शादाब अहमद / जयपुर. प्रदेश में भाजपा-कांग्रेस के अलावा बसपा के पास ही खुद का वोट बैंक है। ऐसे में यदि बसपा-कांग्रेस में गठबंधन हो गया तो प्रदेश में तीसरे मोर्चे की हवा निकलना तय माना जा रहा है। पिछले चार चुनावों में बसपा 2 से 7.6 फीसदी तक वोट हासिल कर चुकी है। वहीं भाजपा के बागी घनश्याम तिवाड़ी, मानवेन्द्र सिंह और हनुमान बेनीवाल चुनाव की तैयारी में लगे हुए हैं। तिवाड़ी ने पार्टी बना ली है, जबकि बेनीवाल वमानवेन्द्र फिलहाल खुद के दम-खम पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं। किरोड़ीलाल के भाजपा में शामिल होने के बाद राजपा कमजोर पड़ गई है। राजपा प्रदेशाध्यक्ष नवीन पिलानिया प्रत्याशी उतारने का दावा कर रहे हैं।

कांग्रेस को दिख रहा फायदा
जानकारों के अनुसार कांग्रेस के नेताओं के मन में कहीं न कहीं बसपा से नुकसान की आशंका भी पनप रही है। आशंका के पीछे 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव के परिणाम हैं। 2013 में बसपा ने तीन सीटों पर चुनाव जीता और सात सीटों पर कांग्रेस को टक्कर से बाहर कर दिया था। इन सात सीटों पर कांग्रेस तीसरे या चौथे नंबर पर रही थी।इन दिनों एससी-एसटी एक्ट भी मुद्दा बना हुआ है।

सीमित क्षेत्रों में असर
कांग्रेस और भाजपा को छोड़ अन्य सभी दलों का असर सीमित क्षेत्रों तक है। जहां मानवेन्द्र सिंह का असर मारवाड़ के सीमावर्ती इलाकों में है तो बेनीवाल शेखावाटी और मारवाड़ के कुछ इलाकों तक ही सीमित हैं। वहीं घनश्याम तिवाड़ी का असर जयपुर-सीकर के आसपास अधिक माना जा रहा है। राजपा के निर्वाचित हुए चार में से तीन विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसके साथ ही राजपा से लड़े कई प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।

बसपा ने लड़ा सभी जिलों में चुनाव
पिछले तीन दशकों से बसपा प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ रही है। 1998 के विधानसभा चुनाव से बसपा के दो विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद हुए तीनों चुनाव में बसपा के उम्मीदवार चुनाव जीतते रहे हैं। इसी बीच 2008 के चुनाव के बाद सरकार बनाने में बसपा की भूमिका काफी अहम रही।


यहां बसपा ने 2013 में जीता था चुनाव

सादुलपुर, खेतड़ी और धौलपुर।

बसपा के चलते कांग्रेस पहुंची थी हाशिए पर

भरतपुर, नगर, तिजारा, भादरा, नदबई, खींवसर और सूृरतगढ़।