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सरसों में फिर छाया राजस्थान: किसानो की मेहनत रंग लाई, रबी सीजन में रिकॉर्ड बढ़त से बना नंबर-1

Rajasthan Agriculture News: राजस्थान में सरसों उत्पादन में 3.6% वृद्धि का अनुमान है। रबी सीजन 2025-26 में नया रिकॉर्ड बना है। जानिए कैसे बढ़ी खेती और पैदावार। पढ़िए पूरी खबर।

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जयपुर

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Himesh Rana

Apr 01, 2026

सरसो की फसल

Rajasthan Agriculture News: राजस्थान एक बार फिर देश में सरसों उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। 2025-26 के रबी सीजन में राज्य ने उत्पादन के मामले में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए नई बढ़त दर्ज की है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुमान के मुताबिक, इस साल देश में कुल सरसों उत्पादन 119.4 लाख टन तक पहुंच सकता है, जिसमें राजस्थान का योगदान सबसे ज्यादा रहेगा। यह दिखाता है कि राज्य न केवल उत्पादन में आगे है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

3.6% की वृद्धि: उत्पादन में बड़ा उछाल

इस वर्ष राजस्थान में सरसों उत्पादन 53.9 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 52 लाख टन से अधिक है। इस तरह राज्य में लगभग 3.6% की वृद्धि दर्ज की जा रही है। वहीं, पूरे देश में भी करीब 3.5% की ग्रोथ देखने को मिल रही है। यह वृद्धि किसानों के लिए सकारात्मक संकेत है और इससे उनकी आय में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

तकनीक से बढ़ी पैदावार

सरसों उत्पादन में इस वृद्धि का मुख्य कारण खेती के रकबे में विस्तार और बेहतर कृषि तकनीकों का उपयोग है। राज्य में सरसों की खेती का क्षेत्रफल बढ़कर 35.77 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 34.74 लाख हेक्टेयर था। इसके अलावा औसत पैदावार भी बढ़कर 1,271 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पहुंच गई है। यह दर्शाता है कि किसानों ने आधुनिक तरीकों को अपनाकर उत्पादन क्षमता में सुधार किया है।

किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर

सरसों उत्पादन में यह बढ़ोतरी न केवल किसानों के लिए बल्कि देश की खाद्य तेल जरूरतों के लिए भी अहम है। भारत लंबे समय से खाद्य तेल के आयात पर निर्भर रहा है, ऐसे में घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। राजस्थान की यह उपलब्धि किसानों की मेहनत और कृषि क्षेत्र में हो रहे सुधारों का परिणाम है। राजस्थान में सरसों उत्पादन की यह वृद्धि कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो आने वाले समय में किसानों की आय बढ़ाने और देश को खाद्य तेल के मामले में मजबूत बनाने में मदद करेगी।