
सस्ती बिजली के लिए आरईआरसी का नया टैरिफ कॉन्सेप्ट, पत्रिका फोटो
Reduce Electricity Bill Tips: अब आपके बिजली का बिल केवल खपत (यूनिट) के आधार पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी तय होगा कि आपने बिजली किस समय इस्तेमाल की। राज्य विद्युत विनियामक आयोग पहली बार टाइम ऑफ यूज (टीओयू) टैरिफ कॉन्सेप्ट लाया है, जिसके तहत दिन के अलग-अलग समय के हिसाब से बिजली की दरें तय होंगी।
इस नई व्यवस्था में उपभोक्ताओं को मोबाइल पर पहले से जानकारी मिलेगी कि कब बिजली सस्ती मिलेगी और कब महंगी। इसके लिए करीब 1 से 1.5 घंटे पहले मोबाइल पर अलर्ट भी आएगा। ताकि लोग अपने घरेलू और व्यावसायिक काम सस्ती बिजली आपूर्ति के समय में शिफ्ट कर सकें। अभी यह कॉन्सेप्ट है, जिस पर बिजली कंपनियों को होमवर्क करना है।
राज्य विद्युत विनियामक आयोग का मानना है कि इस सिस्टम से लोग अपने रोजमर्रा के काम ऐसे समय में करेंगे जब बिजली सस्ती होगी। इससे न केवल बिल कम होगा, बल्कि पीक समय में बिजली व्यवस्था पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा। सोलर एनर्जी का ज्यादा उपयोग बढ़ेगा और पारंपरिक बिजली उत्पादन पर निर्भरता घटेगी। शुरुआत में इसे स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं पर लागू किया जा सकता है।
-सुबह 6 से 10 बजे और शाम 6 से रात 10 बजे - पीक टाइम - ज्यादा रेट
-सुबह 10 से दोपहर 4 बजे - सामान्य, सोलर टाइम- मध्यम या कम रेट
-रात 10 बजे के बाद - ऑफ पीक - ज्यादा सस्ती बिजली
(यदि कोई उपभोक्ता हर दिन शाम 7 बजे तीन घंटे ईवी वाहन चार्ज करता है (पीक टाइम), तो उसे ज्यादा दर देनी पड़ेगी, लेकिन वही चार्जिंग रात 11 बजे कर (ऑफ-पीक), तो बिल में 10 से 20 प्रतिशत तक बचत हो सकती है। आमजन बिजली खपत को सस्ते समय में शिफ्ट कर सकते हैं)
-दिल्ली, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहले से टीओयू या समान मॉडल लागू है।
-अमरीका और यूरोप में यह सिस्टम काफी समय से चल रहा है।
टीओयू कॉन्सेप्ट को पहले सीमित स्लॉट्स के साथ प्रयोग के तौर पर लागू कर उसके परिणाम समझने होंगे। साथ ही मौजूदा टीओडी व अन्य व्यवस्थाओं का प्रभावी विश्लेषण जरूरी है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किन सुधारों की जरूरत है। उपभोक्ताओं की आदतों को समझकर अलग-अलग क्षेत्रों के मुताबिक योजना बनानी होगी। आर. जी. गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, राजस्थान डिस्कॉम्स की
Published on:
09 Apr 2026 08:51 am
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