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राजस्थान में सस्ती बिजली का सपना अटका, करोड़ों के राजस्व को भी लगा झटका

पिछले वर्ष सरकार ने तय किया था कि राजस्थान में अक्षय ऊर्जा के जो भी प्रोजेक्ट लगेंगे, उसमें से सस्ती बिजली का कुछ हिस्सा राज्य के लिए होगा। इसी तर्ज पर एमओयू होंगे। ऐसा होता है तो महंगी बिजली खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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भवनेश गुप्ता

Jaipur News : जयपुर. राजस्थान में 88 हजार मेगावाट के अक्षय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट जमीन आवंटन के फेर में अटक गए हैं। इनके लिए 1.97 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, लेकिन आव ंटन लम्बे समय से सरकार के पास अटके पड़े हैं। कुछ समय पहले तक नॉन बिडिंग प्रोजेक्ट के लिए आवंटन नीति में प्रावधान नहीं होने और कई मामलों में खामियों का हवाला दिया जाता रहा। इनमें अडानी, ग्रीनको, टोरेंट, जेएसडब्ल्यू, रिन्यू पावर, ग्रीनटेक सहित कई कंपनियों के प्रोजेक्ट शामिल हैं। ज्यादातर ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में आवेदन किया था लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार में भी सुलझ नहीं पाए हैं। इससे प्रदेश को मिलने वाली सस्ती बिजली की हिस्सेदारी और मोटा राजस्व नहीं मिल पा रहा है।

जनता और सरकार दोनों को नुकसान…

  1. सस्ती बिजली की हिस्सेदारी में देरी

पिछले वर्ष सरकार ने तय किया था कि राजस्थान में अक्षय ऊर्जा के जो भी प्रोजेक्ट लगेंगे, उसमें से सस्ती बिजली का कुछ हिस्सा राज्य के लिए होगा। इसी तर्ज पर एमओयू होंगे। ऐसा होता है तो महंगी बिजली खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

  1. सरकार की तिजोरी में आए करोड़ों रुपए…
  2. जीएसटी: औसतन 13.8 प्रतिशत जीएसटी है। इसमें आधा 6.9 प्रतिशत हिस्सा राज्य का है।
  3. लीज रेंट: जमीन आवंटन के बाद हर साल लीज रेंट लिया जाता है। अभी तक डीएलसी दर का 5% था, जिसे अब 7.5% किया गया है।
  4. राजस्थान एनर्जी डवलपमेंट एण्ड फैसिलिटेशन: अभी तक फंड के रूप में शुल्क 2 लाख प्रति मेगावाट (प्रति वर्ष) लिया जाता रहा है। कुछ समय पहले ही शुल्क को बिजली उत्पादन से हटाकर जमीन से जोड़ दिया गया। इसका नाम राजस्थान एनर्जी डवलपमेंट एण्ड फैसिलिटेशन किया गया। 50 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर शुल्क है।

इसलिए तेजी जरूरी
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में इन्वेस्टमेंट समिट हुई थी। इसमें करीब 13 लाख करोड़ के एमओयू- एलओआई हुए और उसमें से 10 लाख करोड़ के एमओयू केवल ऊर्जा क्षेत्र के थे। हालांकि ,जमीन आवंटन और अन्य कारणों से ज्यादातर मामलों में सक्सेस रेट कम रही। इसी कारण मौजूदा भाजपा सरकार का फोकस ऐसे मामलों के सरलीकरण पर है।

विंड व हाइब्रिड एनर्जी
कंपनी क्षमता भूमि
रिन्यू पावर 1250 4925

अवाद 4550 19306

अडानी 50000 150000

एचईएमएल 6000 18000

कंपनी क्षमता भूमि
ग्रीनको एनर्जी 1500 4328

अडानी सोलर एनर्जी फोर लि. 661 989

अडानी सोलर एनर्जी फाइव लि. 317 445 *क्षमता : मेगावाट में, भूमि : हेक्टेयर में


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